Tuesday, September 17, 2019

Кремль прокомментировал приговор актеру Павлу Устинову

Кремль не вправе давать оценку вынесенному судом решению по актеру Павлу Устинову, которого суд приговорил к трем с половиной годам лишения свободы за насилие в отношении сотрудника ОМОНа на несанкционированной акции 3 августа, заявил пресс-секретарь президента России Дмитрий Песков.

Есть законное право обжалования решения. Также прерогативой главы РФ не является разбирательство данного дела, этим занимается суд, сказал Песков. Однако Путин знает о резонансных делах, высказался пресс-секретарь.

Пескова также спросили, видели ли в Кремле видео российских актеров в поддержку Устинова. «Не думаю, что президент смотрел это видео» - ответил Песков.

Ранее в поддержку Устинова выложили видео актеры Максим Виторган, Никита Ефремов. Елизавета Боярская, Александр Паль. Также поддержала Устинова телеведущая Тина Канделаки.

Западный берег с тех пор является камнем преткновения в палестино-израильском конфликте. Там и в Восточном Иерусалиме Израилем построено около 140 поселений, которые, с точки зрения международного права, являются незаконными, хотя сам Израиль их таковыми не признает. В поселениях сейчас проживает более 600 тыс. евреев. Палестинцы настаивают на выдворении этих поселенцев со спорных территорий.

"Мы находимся на высшей точке перемен в истории еврейского народа и государства Израиль", - написал Нетаньяху в газете Maariv в понедельник.

"Сегодня я прошу вас проявить уверенность, чтобы завершить историческую миссию и навсегда укрепить границы Израиля и его безопасность", - отметил он.

Wednesday, August 28, 2019

Johnson & Johnson оштрафована на полмиллиарда долларов за опиоидный кризис

Компания Johnson & Johnson оштрафована на 572 млн долларов за то, что выпускаемые ею обезболивающие вызвали эпидемию наркотической зависимости в штате Оклахома, постановил судья.

Фармкомпания немедленно заявила, что подаст апелляцию.

Это первое судебное решение по опиоидному кризису в США. Еще тысячи исков, поданных против производителей и распространителей обезболивающих, ожидают рассмотрения.

Лекарства, содержащие опиоиды, стали причиной почти 400 тысяч смертей от передозировки за период с 1999 по 2017 годы - такова официальная оценка Центров по контролю и профилактике заболеваний США.

В отдельно взятой Оклахоме от передозировки опиоидных лекарственных препаратов в этом веке умерло около 6 тысяч человек, утверждают власти штата.

Две другие фармацевтические фирмы, Purdue Pharma и Teva Pharmaceutical, пошли на урегулирование поданных против них судебных исков и ранее в этом году согласились выплатить в пользу штата $270 млн и $85 млн соответственно.

"Компания использовала псевдонауку и дезинформацию, чтобы преуменьшить риски приема опиоидов, что привело к самому худшему в истории штата и страны общественному кризису, и этот кризис был создан искусственно", - заявил генеральный прокурор штата Оклахома Майк Хантер после объявления судебного решения.

Он описал схему, по которой действовала Johnson & Johnson, когда ученые и правительственные эксперты начали бить тревогу: фармкомпания финансировала организации и ассоциации, занимавшиеся продвижением и скрытой рекламой этих препаратов, выдавая себя за "независимых общественных экспертов" и даже за организации по защите прав пациентов.

"Мы доказали, что Johnson & Johnson построила свой многомиллиардный бренд на алчности, за счет боли и страданий невинных людей", - заявил прокурор.

По закону фармацевтические компании в США не имеют права напрямую платить вознаграждение врачам за то, что они выписывают своим пациентам производимые ими препараты. Однако доктора, которые активно рекомендовали опиоидные препараты, получали систематические бонусы, и в целом их доходы были выше, чем у их коллег, установило исследование некоммерческого американского Общества по борьбе с зависимостями.

Tuesday, August 20, 2019

इमरान ख़ान ने तनाव के बीच जनरल बाजवा का कार्यकाल क्यों बढ़ाया

पाकिस्तान के वर्तमान सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा नवंबर में रिटायर होने वाले थे लेकिन सोमवार को प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के ऑफिस से इस बात की घोषणा की गई कि जनरल बाजवा और तीन साल के लिए सेना प्रमुख बने रहेंगे.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने इस फ़ैसले पर कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति प्रक्रिया और भारत के साथ कश्मीर पर बढ़े तनाव को लेकर यह ज़रूरी फ़ैसला है. क़ुरैशी ने इस फ़ैसले को पाकिस्तान की सुरक्षा से भी जोड़ा है.

पाकिस्तान के पास दुनिया की छठी सबसे बड़ी सेना है जिसका देश के परमाणु हथियारों पर भी नियंत्रण है.

पाकिस्तानी सेना ने पाकिस्तान बनने के बाद से कई तख़्तापलट किए हैं और अब तक क़रीब आधे समय तक देश पर उनका ही राज रहा है.

अभी पाकिस्तान में चुनी हुई सरकार है पर पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियां इमरान ख़ान को सिलेक्टेड पीएम कहती हैं.

क़मर बाजवा तीन साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद नवंबर में रिटायर होने वाले थे लेकिन तीन साल बढ़ाने को लोग विदेश नीति पर सैन्य वर्चस्व से जोड़कर देखते हैं.

इमरान ख़ान सरकार ने सोमवार को कार्यकाल बढ़ाने के दौरान कहा कि सैन्य प्रमुख ने घरेलू मामलों में भी अहम भूमिका निभाई है. उनके आलोचक कहते हैं- इसमें 'राजनीति' भी शामिल है.

इमरान ने कहा, "यह फ़ैसला क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल को देखते हुए लिया गया है."

जुलाई में जब इमरान ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से मुलाक़ात की तब बाजवा उनके साथ थे.

अमरीकी अधिकारियों और तालिबान का कहना है कि उन्होंने अमरीका और तालिबान के बीच महीनों तक चली वार्ता में ट्रंप प्रशासन का सहयोग किया.

तालिबान का नेतृत्व पाकिस्तान में स्थित है.

जब भारत ने जम्मू-कश्मीर को दी गई स्वायत्तता ख़त्म करने का फ़ैसला किया तब से पाकिस्तान के साथ रिश्तों में तल्खी बढ़ी है.

कश्मीर को लेकर 1947, 1965 और 1999 में दोनों देशों के बीच युद्ध हो चुके हैं.

फ़रवरी में, भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा में चरमपंथी हमला हुआ था, जिसमें सीआरपीएफ़ के 40 जवानों की मौत हुई थी.

भारत ने इसके लिए पाकिस्तान स्थित जिहादी समूह को ज़िम्मेदार बताया था. इसे लेकर दोनों देशों के बीच इसी साल फ़रवरी में सैन्य टकराव की स्थिति बन गई थी.

अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से समूचे राज्य में संचार सेवाएं बंद हैं और स्थानीय आबादी के सड़क पर आने की आशंका है. दोनों देशों के बीच एक और सैन्य टकराव की आशंका पैदा हो रही है.

Wednesday, July 31, 2019

अमरीका में डूबती Netflix की नैया क्या भारत बचा पाएगा

वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म नेटफ़्लिक्स ने भारतीय यूज़र्स के लिए अपना सस्ता 'मोबाइल-ओनली' प्लान लॉन्च किया है.

नेटफ़्लिक्स अमरीका में हज़ारों सब्सक्राइबर खो चुका है. लेकिन सवाल ये है कि क्या अब नेटफ़्लिक्स भारत से अपने वित्तीय संकट को उबार सकता है.

बतौर मनोरंजन पत्रकार रोहित खिलानी बॉलीवुड और टीवी जगत ने कई टीवी स्टार को देखा है, लेकिन जब साल 2017 में हॉलीवुड स्टार ब्रैड पिट मुंबई अपनी फ़िल्म के प्रमोशन में पहुंचे तो लगा कि अमरीकी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री भारत को लेकर एक्शन में है.

पिट पहले अमरीकी स्टार हैं जो भारत ख़ुद अपनी फ़िल्म को प्रमोट करने आए. इसके बाद क्रिश्चिन बेल और विल स्मिथ भी भारत आए. महत्वपूर्ण बात ये है कि ये स्टार किसी बड़े प्रोडक्शन हाउस जैसे- वार्नर ब्रदर्स या सोनी के लिए नहीं बल्कि नेटफ़्लिक्स के लिए आए थे.

कैलिफ़ोर्निया की इस वीडियो स्ट्रीमिंग कंपनी ने भारत पर फ़ोकस बढ़ाने की दिशा में एक और क़दम बढ़ाया है और 199 रुपये प्रति माह कीमत वाला 'मोबाइल ओनली' प्लान उतारा है और नेटफ़्लिक्स ने ये क़दम तब उठाया गया है जब उसने अपने ही देश में 1 लाख 26 हज़ार सब्सक्राइबर खो दिए हैं.

भारत में नेटफ़्लिक्स ने कई बड़े निवेश किए हैं कई हिट ओरिजनल सीरीज़ बनाई है, जैसे- सेक्रेड गेम, चॉपस्टिक, लस्ट स्टोरीज़ और घोल.

इसके बावजूद भारत में अब तक नेटफ्लिक्स अपने पांव उस हद तक नहीं पसार सका जिसकी उसे उम्मीद थी.

133 करोड़ आबादी वाले देश में नेटफ्लिक्स के पास केवल 40 से 60 लाख ही कस्टमर हैं. वहीं, कंसल्टिंग फर्म रेडशीर के मुताबिक भारतीय वीडियो स्ट्रीमिंग कंपनी हॉटस्टार के मासिक एक्टिव यूज़र्स की तादाद 30 करोड़ है.

कंसल्टिंग फ़र्म पीडब्लूसी के साझेदार राजीब बसु कहते हैं, ''भारत एक प्राइस सेंसेटिव मार्केट है, नेटफ्लिक्स ने एक सीमित वर्ग को ही टारगेट किया है जो शिक्षित और थोड़े कुलीन परिवार से है. जो इंटरनेशनल कंटेंट की समझ रखते हैं. नेटफ्लिक्स के भारतीय कंटेंट भी हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों ही भाषाओं में आते हैं.''

''भारत एक ऐसा देश है जो सस्ते केबल कनेक्शन और डेटा प्लान के लिए जाना जाता है. लेकिन इन सबके बीच नेटफ्लिक्स को लगता है कि लोग उसके कंटेंट को समझेंगे और इसके लिए पैसे भी देंगे.''

भारत में नेटफ्लिक्स के दो बड़े प्रतिद्वंदी, हॉटस्टार और एमेज़न प्राइम कस्टमर्स को कई तरीकों से लुभाते हैं. जैसे हॉटस्टार लाइव क्रिकेट से जुड़े ऑफ़र देता है तो एमेज़न प्राइम में ग्राहकों को फ़्री डिलीवरी दी जाती है.

इसके अलावा इस क्षेत्र में कई छोटे खिलाड़ी भी हैं जिनको कई टेलीकॉम कंपनियां बंडल ऑफ़र में फ़्री देती हैं.

लेकिन उत्तरी अमरीका और यूरोप से अलग भारत एक ऐसा बाज़ार है जिसमें कई संभावनाएं हैं और नए- ओरिजनल कंटेंट की खपत को लेकर भी बड़ी गुंजाइश नज़र आती है.

कंसल्टिंग फ़र्म ईवाई के मुताबिक पिछले साल में डिजिटल सब्सक्रिप्शन में 262% का इज़ाफ़ा हुआ है. यानी 205 मिलियन डॉलर का व्यापार इस इंडस्ट्री में हो चुका है. ये उछाल ज़्यादातर वीडियो प्लेटफॉर्म के कारण ही हुआ है.

कंसल्टिंग कंपनी बीसीजी के मुताबिक हर भारतीय औसतन 4.6 घंटे मीडिया देखने में लगा रहा है, जिसमें टीवी, डिजिटल और रेडियो शामिल है. ये आंकड़े अमरीका से काफ़ी पीछे हैं जहां लोग औसतन 11.8 घंटे बिताते हैं.

बसु कहते हैं, ''अब नेटफ्लिक्स टू और थ्री टियर शहरों पर अपना फ़ोकस बढ़ाने वाली है. जहां हाई स्पीड ब्रॉडबैंड और केबल टीवी तो नहीं है लेकिन स्मार्टफोन सबके हाथों में है.''

''लोगों तक पहुंचने के लिए नेटफ्लिक्स को सेक्रेड गेम जैसे शो के साथ आना होगा और ज़रूरी है कि क्षेत्रीय भाषा में अब कंटेंट लाना होगा.''

रोहित खिलानी कहते हैं अपने विस्तार को बढ़ाने के लिए अब नेटफ्लिक्स को गांवों और कस्बों में पकड़ बनानी होगी और ये तभी संभव है जब मोबाइल को ध्यान में रखकर प्लान उतारे जाते हैं.

Wednesday, July 24, 2019

Умер Рутгер Хауэр, сыгравший репликанта в "Бегущем по лезвию"

Голландский и голливудский киноактер Рутгер Хауэр скончался в возрасте 75 лет после короткой болезни.

Как сообщил его агент, Хауэр умер еще 19 июля, а в среду, 24 июля, в Нидерландах состоялись похороны.

Славу Хауэру принесли образы уникальных сильных личностей, обладающих глубиной и экстраординарными качествами.

До работы в Голливуде Рутгер Хауэр стал одним из ведущих актеров голландского кинематографа и много работал со своим соотечественником - режиссером Полом Верховеном. В частности, первую известность актеру принесла роль в фильме Верховена "Турецкие наслаждения", который был признан на родине лучшим нидерландским фильмом всех времен.

Одна из самых знаменитых его ролей - репликант-убийца Рой Батти в культовом фильме Ридли Скотта "Бегущий по лезвию" 1982 года, где Хауэр сыграл антагониста героя Харрисона Форда. Философский монолог, который герой Хауэра произносит сцене их противостояния, был написан им самим. "Я видел то, во что вы, люди, даже не поверите... Все эти мгновения потеряются во времени, как слезы под дождем. Пришло время умереть".

Как объяснял актер в одном из интервью, главным мотивом для его персонажа, репликанта Роя Батти, продолжительность функционирования которого составляла лишь четыре года, было желание оставить свой след на лице бытия. "В последней сцене репликант, умирая, демонстрирует [главному герою Рику] Декарду, из чего сделан настоящий человек".

Хауэр сыграл главную роль в американском фильме 1987 года "Побег из Собибора" о советском лейтенанте Александре Печерском - организаторе и лидере восстания заключенных в нацистском лагере смерти в годы Второй мировой. За роль Печерского голландский актер получил премию голливудской Ассоциации иностранной прессы "Золотой глобус".

Оскароносный режиссер Гильермо дель Торо написал в "Твиттере": "Земля пухом (RIP) великому Рутгеру Хауэру: мощный, глубокий, правдивый и обладающий магнетизмом актер, который привнес в свои фильмы правду, силу и красоту".

Помимо боевиков ("Ночные ястребы") Хауэр отметился яркими ролями в фильмах ужасов и лентах про вамипиров: он сыграл Ван Хельсинга в "Дракуле 3D" и вампира Барлоу в мини-сериале "Салем" по роману Стивена Кинга.

Рутгер Хауэр родился в пригороде Амстердама во время войны - 23 января 1944 года. Подростком он нанялся на торговое судно и ходил в море, в 18 лет вернулся в Амстердам и стал изучать актерское дело, но бросил и записался в армию. Первую роль на телевидении он получил в 1969 году.

Хауэр был признан "лучшим актером Нидерландов ХХ столетия" и жил на родине до последнего дня, хотя продолжал сниматься и в Голливуде. Список фильмов, где он сыграл, огромен - более ста картин. Один из последних фильмов, где снялся Хауэр - черная комедия-вестерн "Братья Систерс".

Wednesday, July 3, 2019

Führende Scientologen gehören zu den aktivsten Immobilienplayern der Stadt

Die Scientology-nahe Swiss Immo Trust AG aus Kaiseraugst ist eine wichtige Akteurin auf dem Basler Immobilienmarkt. Dabei geht die Firma nicht gerade zimperlich vor.

Ein Firmengeflecht rund um die Swiss Immo Trust AG in Kaiseraugst war massgeblich an der Finanzierung der Scientology-Zentrale am Rande Basels beteiligt. Recherchen der TagesWoche zeigten, wie führende Personen in diesen Firmen mit ihren namhaften Spenden einen Grossteil des Sektentempels an der Burgfelderstrasse finanzierten.

Doch nicht nur innerhalb des Basler Ablegers von Scientology ist dieses Unternehmen eine relevante Grösse. Wie unsere Datenauswertung zeigt, gehört die Swiss Immo Trust zu den wichtigsten Akteuren im Geschäft der Umwandlung von Mietwohnungen in Stockwerkeigentum.

Die TagesWoche hat die im Kantonsblatt publizierten Handänderungen auf dem Basler Immobilienmarkt seit Mitte 2008 ausgewertet. Eine solche Transaktion beschreibt den Verkauf einer Immobilie. Naturgemäss geschieht dies bei der Umwandlung in Stockwerkeigentum in relativ kurzer Zeit gleich mehrfach. Ein Unternehmen kauft eine Liegenschaft auf, renoviert oder baut neu und bringt die Wohnungen daraufhin einzeln auf den Markt. Statt einem einzelnen Eigentümer gibt es nun viele verschiedene.

Umstrittenes Business
Dieses Business gilt deshalb als umstritten, weil dadurch sehr oft günstiger Wohnraum verloren geht. Bevor die Umwandlung in Wohneigentum möglich ist, müssen die bisherigen Mieter nämlich weichen.

Zwischen 2010 und 2014 war die Swiss Immo Trust an über 50 solcher Handänderungen beteiligt. Bei 43 davon ging es um Stockwerkeigentum, verteilt auf insgesamt fünf Bauprojekte. Die Liegenschaften befinden sich allesamt im Gebiet zwischen Schützenmatt- und Kannenfeldpark. Bei all diesen Projekten immer mit dabei: Rudolf Flösser, leitender Direktor von Scientology Basel.

Grösstes Projekt war die Überbauung zwischen der Türkheimerstrasse und dem Spalenring. Dort kaufte die Swiss Immo Trust zwei ältere Liegenschaften auf, um sie durch einen Neubau mit 21 Eigentumswohnungen zu ersetzen.

Das Projekt an der Türkheimerstrasse wurde von der
BW-Liegenschaftsverwaltung geleitet, die sich ebenfalls in den Händen einer Scientologin befindet.

Dies Leitung dieses Projekts oblag der BW-Liegenschaftsverwaltung GmbH, einer Firma von Brigitte Widmer – Scientologin und potente Spenderin für den Bau der Sektenzentrale. Die Wohnungen waren zuvor sehr günstig, eine 3-Zimmer-Wohnung kostete weniger als 1000 Franken.

Das Geschäft ging nicht reibungslos über die Bühne, weil sich einige der verbliebenen Mieter gegen ihre Kündigungen wehrten. Darunter zwei Gewerbler, eine Druckerei und ein Malergeschäft. Diese suchten Hilfe beim Mieterverband und erhoben Einsprache.

Eine erste Kündigung, ausgesprochen durch die Firma BW-Immobilientreuhand, ebenfalls aus dem Umkreis der Scientology, erfolgte zur Unzeit und wurde deshalb für ungültig erklärt. Das Bauprojekt in seiner ersten Version (hauptsächlich 1- und 2-Zimmer-Wohnungen) hielt der gerichtlichen Prüfung ebenso wenig stand und wurde für untauglich befunden. Die Mieter durften ein Jahr länger bleiben.

Nachträgliche Kosten
Unangenehm aufgefallen ist die Swiss Immo Trust auch auf dem Land. 2008 berichtete etwa der «Blick» von einer Überbauung in Therwil. Dort wurde sämtlichen 28 Mietparteien wegen Sanierungsbedarf gekündigt – ihre Wohnungen wurden danach während der Euro 08 aber für mehr als 400 Franken pro Tag an Fussballfans zwischenvermietet.

In einem anderen Fall in Oberwil kam es zwischen dem Unternehmen und
26 Käuferparteien von Eigentumswohnungen zu einem Streit wegen einer Rechnung von 600’000 Franken. Die Swiss Immo Trust wollte diese Anschlussgebühr für Wasser und Kanalisation nachträglich auf die Käufer überwälzen.

Diese gingen jedoch davon aus, dass diese Gebühren bereits im Kaufpreis enthalten gewesen waren. Erst nachdem wiederum die BaZ recherchiert hatte, zeigte sich die Swiss Immo Trust einsichtig und verzichtete auf die Forderung.

Tuesday, June 25, 2019

习近平同乌干达总统穆塞韦尼举行会谈

  新华社北京6月25日电(记者孙奕)国家主席习近平25日在人民大会堂同来华进行工作访问的乌干达总统穆塞韦尼举行会谈。两国元首一致同意,将中乌关系提升为全面合作伙伴关系。

  习近平赞赏穆塞韦尼作为非洲资深政治家为推动中乌关系和中非关系发展作出的重要贡献。习近平指出,当前,中乌关系正处于历史最好时期。两国政治互信不断增强,务实合作成果丰硕,在国际和地区事务中保持密切协作。中方愿同乌方一道努力,以共建“一带一路”和落实中非合作论坛北京峰会成果为契机,推动两国关系不断发展,更好造福两国人民。

  习近平强调,中乌要继续在涉及彼此核心利益和重大关切问题上相互理解、相互支持。中方坚定支持乌方探索有乌干达特色的发展道路,愿同乌方加强治国理政经验交流,就北京峰会“八大行动”深入对接,加强基础设施建设、贸易、能源、农业、疫情防控、人力资源、工业园区、旅游等领域合作,鼓励中国企业按照市场化原则参与对乌投资,推动论坛峰会成果更快、更好在乌干达落地。中方赞赏乌方在维护地区和平稳定中发挥的积极作用,支持乌方维护本国安全的努力。中乌要共同旗帜鲜明地反对保护主义、单边主义,维护以联合国为核心的国际体系和国际秩序,致力于构建新型国际关系和人类命运共同体。

  穆塞韦尼表示,中国和非洲是长期友好的朋友。在非洲民族解放和国家建设中,中国给予了宝贵帮助。乌干达钦佩中国改革开放以来取得的巨大发展成就,愿学习中国共产党的治国理政经验。乌方希望以建立乌中全面合作伙伴关系为契机,深化双方在广泛领域的合作。单边主义非常危险,乌中要加强在联合国等多边事务中的沟通协调。

  新华社北京6月25日电(记者张晓松、林晖)第九届全国“人民满意的公务员”和“人民满意的公务员集体”表彰大会25日在京举行。中共中央总书记、国家主席、中央军委主席习近平在人民大会堂亲切会见受表彰代表,向他们表示热烈祝贺,勉励他们不忘初心、牢记使命,在本职岗位上作出更加优异的成绩。

  中共中央政治局常委、国务院总理李克强,中共中央政治局常委、中央书记处书记王沪宁参加会见。

  下午4时30分,习近平等来到人民大会堂北大厅,全场响起热烈掌声。习近平等同代表们亲切握手,不时交谈,并同大家合影留念。

  中共中央政治局委员、中央组织部部长陈希参加会见并在表彰大会上讲话。他说,公务员是干部队伍的重要组成部分,是社会主义事业的中坚力量。广大公务员要向受表彰的先进个人和集体学习,自觉做习近平新时代中国特色社会主义思想的坚定信仰者、忠实实践者,不忘初心、牢记使命,担当作为、真抓实干,以无愧于时代、无愧于人民、无愧于历史的业绩,为“人民满意”这份崇高而神圣的荣誉增光添彩

Monday, June 17, 2019

Журналист задержан по делу о финансировании терроризма в Дагестане

В Дагестане задержан редактор газеты "Черновик" Абдулмумин Гаджиев, сообщают его коллеги. По их информации, журналисту вменяют статью террористической направленности.

"Гаджиев задержан по статье террористической направленности - о финансировании терроризма. Скорее всего, в данный момент он находится на допросе", - сообщил Би-би-си главный редактор "Черновика" Маирбек Агаев.

По его словам, произошедшее с Гаджиевым - "нелепица" и "абсурд".

В заявлении на сайте газеты говорится, что редакция будет "требовать снять с Гаджиева все абсурдные обвинения и привлечь к ответственности тех, кто откровенно выдумывает обвинения и формирует пустые уголовные дела, ломающие людям судьбы".

Адвокат Арсен Шабанов уточнил в разговоре с Би-би-си, что Гаджиева подозревают в участии в террористической организации (ч. 2 ст. 205.5 УК РФ) и содействии терроризму (ч. 4 ст. 205.1 УК РФ).

Наказание по этим статьям предусматривает от 10 до 20 лет лишения свободы.

По словам адвоката, следствие полагает, что журналист перечислял деньги на счета исламского проповедника Абу Умара Саситлинского (Исраила Ахмеднабиева).

Сейчас Гаджиев находится на допросе в управлении Следственного комитета России по Дагестану, добавил Шабанов.

Журналист дагестанского издания "Новое дело" Идрис Юсупов сообщил "Кавказскому узлу", что ранее дома у Гаджиева прошел обыск.

"Во дворе стояли две "Газели", были силовики в камуфлированной форме и в гражданской одежде. После того как я приехал, буквально через минуту, его вывели в наручниках и посадили в "Газель". Сотрудники правоохранительных органов препятствовали ведению видеозаписи", - сказал он.

Как отмечает "Кавказский узел", самого Юсупова ранее неоднократно задерживали за "видеосъемку рейдовых мероприятий, осуществляемых силовиками возле мечети "Тангим" в Махачкале".

"Черновик" - одна из самых известных независимых газет в Дагестане. Задержанный журналист работает в ней редактором отдела "Религия".

Гаджиев - один из опытнейших работников, сказал Би-би-си главный редактор Агаев. "Он освещал не только религиозную тематику, он математического склада ума человек: отлично разбирается в математике, физике, экономике, в исламских финансах, исламской экономике. Помимо этого, он занимался своими каким-то проектами", - рассказал Агаев.

"В его материалах не содержалось ничего такого, ничего антикоррупционного. У него миролюбивые, обучающие статьи. Напрямую связать это дело с его статьями в "Черновике" никак нельзя", - добавил главный редактор.

По информации источника Интерфакса, по делу Гаджиева также задержаны Абубакар Ризванов и Кемал Тамбиев. Ризванов, по словам собеседника агентства, ранее был судим по той же статье и вышел на свободу в прошлом году.

Проповедник Ахмеднабиев, в перечислении денег которому подозревают Гаджиева, также обвиняется в финансировании терроризма. Он отрицает причастность к террористической деятельности и сейчас находится за границей.

Эксперт общественной организации Free Russia Foundation Денис Соколов рассказывал, что Ахмеднабиев - религиозный активист, который создал несколько медресе в Дагестане и Стамбуле.

Thursday, May 30, 2019

От "сказочного" до реального: оскорбление власти из вологодского села

Новые статьи Кодекса об административных нарушениях (КоАП) об оскорблении власти быстро пригодились для наказания тех, кто критикует российского президента. Разлетевшаяся по сети фраза о "сказочном ***********" родила уже три судебных дела. Фигурант одного из них, житель вологодского села Верховажье Юрий Шадрин, не собирается отказываться от опубликованного на своей страничке во "ВКонтакте" бранного заявления.

"Владимира Владимировича" зарезали прошлым летом. Частично продали, частично съели его. Аналогичная судьба постигла "Патриарха Кирилла", "Вовку Соловьева" и других свиней Шадрина. Он говорит, что называет скотину так, чтобы "резать не жалко было". В день интервью один из отсеков свинарника делят Сцилла и Харибда. Харибда крупней и оттирает соплеменницу от кормушки. Харибду скоро зарежут.

Это похоже на дешевый троллинг, но кажется, что игры с кличками и сетевая активность Шадрина - не поверхностный стеб. Они укладываются в довольно стройную и редкую для деревни либеральную систему взглядов. Говоря о политике, 44-летний селянин, переселившийся на Вологодчину шесть лет назад, способен довести начатый тезис до конца без длинных пауз на обдумывание слов. Тоже необычно.

Окончательно с воззрениями на правящий режим Юрий определился после аннексии Крыма. "Это была последняя капля, стало ясно, что власть наша никуда не годится. До этого я тоже ее не сильно любил, но не думал, что все так плохо. А это, Крым, ну это ж явная агрессия, оккупация, нарушение договоров".

С протестом против аннексии Крыма Шадрин в Верховажье был белой вороной. За пять лет, говорит он, накал "крымнашизма" ослаб, а недовольство властью выросло. Но таких отчаянных фрондёров Верховажье не видело еще.

Откликаясь на флешмоб со ставшей известной фразой, Юрий написал в статусе своей страничке во "ВКонтакте": "Путин - *********** реальный, а не сказочный". Удивительно, но удалять эту надпись со страницы Шадрину никто не предписывал и пока что она красуется там во всем своем непотребстве.

Ну и "прилетело" ему довольно быстро. В середине мая было начато следствие по статье о мелком хулиганстве. Третьей ее части, той самой, где говорится о "явном неуважении". Автора первоначального заявления, Юрия Картыжева из Малой Вишеры в Новгородской области, уже наказали штрафом в 30 тысяч рублей. Суд по делу Шадрина начнется 7 июня.

Большая часть сетевой активности Шадрина - перепосты статей, критических по отношению к Путину, адептам Сталина и СССР, "патриотической" общественности. Но новости о готовящемся принятии "закона Клишаса" (так в народе окрестили поправки об оскорблении власти) Юрий комментировал в марте сам, так что уж точно не может утверждать, что понятия не имел о совершении деяния, которое совсем недавно вошло в разряд противоправных.

На это Шадрин отвечает так: Путиных в России много. "Пусть они докажут, что я имел в виду президента. У меня же не написано на странице "Президент России Путин - *********". Доказать, какого конкретно Путина они имеют в виду, по идее, они не могут".

Юрий знает, что острые на язык комментаторы то и дело идут по разным статьям, но все равно удивлен, что из кучи страниц со "сказочной" фразой обнаружили именно его изречение. "Чтобы на какую-то деревенскую страницу обратили внимание… Я об этом даже и не думал. Если посмотреть, сколько таких подобных негативных, матерных в том числе, высказываний в сети, то вероятность того, что привлекут именно тебя, маленькая".

Назад в СССР
До Верховажья ехать от Вологды два часа, но эта глубинка не производит впечатления депрессивной. Дома стоят ровно, многие хорошо отделаны. Рядом с Верховажьем когда-то жили родители Юрия. Все окрестные села повымирали. А это пока что держится: тут валят и обрабатывают лес, строят и отделывают дома, есть молочные фермы. По ухабам на сельских улицах плавают не старые "жигули", а средней руки иномарки.

У Юрия - всего лишь Datsun, но открытая кухня и гостиная в доме создают впечатление, что жилище обустраивал обеспеченный столичный дауншифтер - высокие потолки, хорошая отделка, встроенная кухонная техника и софиты в потолке. Но нет, Шадрин - простой мастер по ремонту бытовой техники, приехал сюда с женой шесть лет назад из Мурманска в поисках более комфортного климата и собственного дела. Бытовую технику продолжает чинить: в прихожей в ожидании нужной запчасти томится чья-то стиральная машина.

План по созданию мини-фермы, однако, натолкнулся на финансовые препятствия: Юрий сначала держал коров, коз и свиней, но без кредитов развивать хозяйство не мог. Кредитов ему не дали. Теперь в хлеву почти совсем пусто, и кем заселять его дальше, Шадрин пока думает. Но со сбытом проблем нет - мясо всех этих "Владимиров Владимировичей", "Сцилл-Харибд" и "Вовок Соловьевых" расходится среди жителей пятитысячного села довольно хорошо.

Единомышленников у него в Верховажье немного. "Большинство людей здесь сейчас уже не очень любит Путина, но, тем не менее, приветствуют его внешнюю политику. А внутренней недовольны. Большинство здесь придерживаются взглядов коммунистических, хотят обратно в Советский Союз, мечтают о новом Сталине, который бы покарал всех воров".

Редкий момент унисона с народным недовольством случился у Шадрина летом прошлого года. Тогда он организовал первый в истории села протестный митинг. Из-за пенсионной реформы.

"Власти отнеслись к этому вполне нормально, - рассказывает он. - Я подал объявление на сельской странице во "ВКонтакте", люди откликнулись, тема митинга была актуальна, пенсионная реформа всех возмущала. Тут было триста человек, для села это много, людям было интересно". 300 человек - 6% населения села. В Санкт-Петербурге для такой пропорции понадобилось бы вывести на площадь 300 тысяч.

Основную речь толкал сам Шадрин - называл власть преступной, Путина - засидевшимся у руля, изобличал двуличие тех, кто держит свои деньги и детей за рубежом, при этом загоняя Россию в конфликт со всем цивилизованным миром. Спрашивал, почему деньги уходят на военную операцию в Сирии, напоминал, что правительство несколько раз перекраивало в последние годы пенсионные схемы. Ему хлопали.

А местная газета написала про митинг нелестный отзыв. Статья без подписи автора утверждала, что это пустая критика без предложений, выпуск пара, неконструктивное событие. "Где резолюция? Конкретные предложения, которые можно направить хотя бы в Общественную палату или в Народный фронт?" - вопрошала передовица.

"Меня это возмутило. Я назвал редактора газеты гадким человеком, она написала заявление в полицию. Суд я проиграл, подавал жалобу, второй суд тоже проиграл. На втором суде меня поразила абсолютная некомпетентность властей. Прокурор пошел вместе с судьей писать заключение. Они вообще что-нибудь слышали про разделение властей?!"

Вскоре одна из свиней в шадринском хлеву получила прозвище, идентичное имени гособвинителя.

Wednesday, May 22, 2019

霍克去世:从中国外交翻译眼中看这位澳大利亚总理

霍克5月16日在新南威尔士州的家中去世,澳大利亚总理莫里森(Scott Morrison)发表悼词,形容霍克有一种可以跟“所有人对话的独特能力”。中国外交部发言人赞扬,霍克“长期关心和支持中澳关系发展”,向他的家人表示慰问。

曾经三次陪同中国领导人与霍克见面的外交部翻译高志凯也在社交网站发文悼念,对霍克去世表示哀悼。他在1980年代多次为中澳领导人会面担任官方翻译,包括参与数次中共前总书记胡耀邦和霍克的一对一会谈。

高志凯在接受BBC中文专访的时候回忆,霍克是一个真诚的人,他跟中国领导人见面的时候把自己的情感和关注点都融到官方会谈中,让中澳领导人谈得非常融洽。

“这一点往往是80年代中期,中国领导人和外国领导人,尤其是西方国家的领导人很难做到的一点。因为当时跟例如说美国英国或其他国家(领导人)谈的时候,都比较拘谨。”

霍克在1983年3月成为澳大利亚总理后不到一个月,就迎来当时中国国务院总理赵紫阳访问,是中国改革开放后第一位访问当地的中国领导人。

当年共产党领导下的中国大陆刚刚回到世界舞台,中国领导人邓小平宣布改革开放政策不够10年,跟美国建立正式外交关系更只有四年。

霍克之后任内还多次到访中国,但他不是首位访华的澳大利亚领导人。惠特兰(Gough Whitlam)1971年访问中国,成为首个在任期间访华的澳大利亚总理,两国第二年就建立正式外交关系。

这个关系在霍克上任后继续发展。霍克去世后,澳大利亚国际事研究所主席(Australian Institute for International Affairs)金吉尔(Allan Gyngell)接受当地媒体访问时说,霍克当时面对的是一个“正在从文化大革命混乱复原的中国”,而中国当时在国际社会的角色慢慢变得重要,也成为澳大利亚的一个市场。

澳大利亚在霍克领导下,跟中国签订协议促进两国在钢铁工业的合作。到今天,澳大利亚钢铁原材料其中一个最大的买家仍然是中国。

他在1989年天安门事件后,给所有当时在澳大利亚的中国公民延续签证,最后更给其中约四万多人发出永久居留权。

霍克离任总理后,仍然继续推动中国和澳大利亚的关系,被视为2001年成立博鳌亚洲论坛的一个主要帮手。

高志凯说霍克非常重视与中国的关系,拿出很多经济合作机会跟中方进行探讨。他第一次跟霍面碰面,是1985年跟随前中共总书记胡耀邦访问澳大利亚,中方代表团当时受到了热烈的欢迎,两名领导人的会面也十分融合。他说,霍克看到的“不只是1985年的中国”,而是中国有“很大的发展潜力”,而澳大利亚以后的日子肯定是“跟中国不断地发展、不断地壮大”。

但这种融合的会面气氛,与霍克的性格也有很大的关系。高志凯形容,霍克有“很多个人的魅力”,而且他把自己的情感和关注点都融合到官方会谈中,真正做到了“老朋友”之间的见面。

1980年的霍克50多岁,高志凯回忆,霍克的脸有很深的折皱,对于他这个年纪的人来说非常有特色,令他可能变得非常严厉,但同时他一微笑起来,就会变成非常感人的微笑。“他是一个非常和蔼可亲的一个人,这一点是跟其他很多国家的——尤其是西方国家的,包括英国美国的——领导人跟中国人见面的时候,我觉得是有巨大的一个反差。”

他说中方领导人跟霍克会面时能够明显的感觉到,他把中国和澳大利亚放在平等的地位。“他是希望中国好,也希望澳大利亚好。”

“他不是做作,他是真诚的一个人,他的话是来自肺腑的话。这个是非常难得的一件事情。”

近距离与霍克工作
高志凯在1983年加入中国外交部翻译室工作。他说,作为中国官方的翻译员,其工作是协助中澳两国领导人交谈,自己跟对方领导人交流不是他的工作,但作为英文翻译的特殊性,是必须非常近距离地靠近中国领导人,同时也靠近澳大利亚领导人。

他提到,霍克1986年访问中国,在北京跟邓小平、赵紫阳等中国领导人见面。然从转到南京和成都,在这两个城市访问时跟胡耀邦花了三个晚上,进行了总共九个多小时的一对一详谈。

高志凯当时是这次对话的中方翻译员,也是他第二次与霍克碰面。

这些会谈都安排在正式晚宴结束后才进行。中澳双方各自都只派出三个人出席,中方代表有胡耀邦、高志凯和外交部一名官员,另一方就有霍克、澳大利亚驻华大使和澳方的翻译。“一个房间里只有六个人,三个是澳大利亚人,三个是中国人,所以这个范围是非常非常小的。所以打招呼、寒喧是不可避免的。”

“但是在这么一个重要的场合,我作为一个国家级的专业翻译人员,我非常清楚我的任务是协助胡耀邦总书记和霍克总理更好地交谈。因此必须做到全心全意,而不能担误大家的时间,扯到别的问题。”

Thursday, April 25, 2019

फिदायीन हमलावर अमीर कारोबारी था, पुलिस घर पहुंची तो छोटे भाई ने भी खुद को उड़ा लिया

कोलंबो. यहां की फाइव स्टार शांगरी-ला होटल में फिदायीन हमला करने वाले इंशाफ इब्राहिम (33) की तांबे की फैक्ट्री थी। धमाके के बाद जब पुलिस उसके घर पर छापा मारने पहुंची तो छोटे भाई इल्हाम (31) ने भी खुद को बम से उड़ा लिया। इसमें इल्हाम की पत्नी और 3 बच्चों की भी मौत हो गई। रॉयटर्स न्यूज एजेंसी ने एक सूत्र के हवाले से यह जानकारी दी है। 21 अप्रैल को श्रीलंका में हुए 8 धमाकों में 359 लोग मारे गए, जिनमें 10 भारतीयों समेत 39 विदेशी नागरिक थे।

गतिविधियों के बारे में पड़ोसियों को भी जानकारी नहीं थी
दोनों भाई कोलंबो के महावेला गार्डन्स इलाके के एक तीन मंजिला घर में रहते थे। उनके पड़ोस में रहने वाली फातिमा फजला के मुताबिक- वे सभ्य लोगों की तरह दिखते थे। हमें कभी अहसास भी नहीं हुआ कि वे आतंकी गतिविधियों में लगे हुए थे। महावेला गार्डन्स में अमीर लोग रहते हैं।

इंशाफ और इल्हाम के पिता मोहम्मद इब्राहिम को पूछताछ के लिए पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मोहम्मद मसालों के कारोबारी हैं और व्यापार जगत में रसूख रखते हैं। उनके छह बेटे और तीन बेटियां थीं।

‘मुस्लिमों पर संदेह किया जा रहा’
फजला ने बताया कि मोहम्मद इब्राहिम गरीबों को खाना-कपड़े देने के लिए मशहूर थे। हमें विश्वास नहीं होता कि उनके बच्चे ऐसा भी कर सकते हैं। इंशाफ-इल्हाम ने जो किया, उससे सभी मुस्लिमों को शक की नजर से देखा जा रहा है। पड़ोस में रहने वाली संजीवा जयसिंघे के मुताबिक- घटना से हैरान हूं। मैं सोच भी नहीं सकती कि वे ऐसे लोग थे।

परिवार के एक करीबी का कहना है कि इल्हाम खुलेतौर पर कट्टरपंथी विचारों का समर्थन करता था। वह स्थानीय चरमपंथी गुट नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) की बैठकों में शामिल होता था। इल्हाम की तुलना में इंशाफ उदार विचारों का था। वह भी गरीब लोगों की मदद किया करता था। इंशाफ ने एक आभूषण निर्माता की बेटी से शादी की थी और उसे पैसे की कोई कमी नहीं की थी।

राष्ट्रपति ने पुलिस प्रमुख और सुरक्षा सचिव से इस्तीफा मांगा

श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने देश के पुलिस प्रमुख पी. जयसुंदरा और सुरक्षा सचिव एच.फर्नांडो से इस्तीफा देने काे कहा है। राष्ट्रपति के करीबी अधिकारी ने न्यूज एजेंसी को बताया कि यह निर्णय रविवार को हुए बम-धमाकों को सुरक्षा में भारी चूक मानते हुए लिया गया। सिरिसेना ने मंगलवार शाम कहा था कि अगले 24 घंटे में सुरक्षाबलों के प्रमुख बदले जाएंगे।

वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद अपना रोड शो शुरू किया। वे यहां से दूसरी बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। 7 किलोमीटर लंबा रोड शो दशाश्वमेध घाट पर खत्म होगा। इस दौरान अलग-अलग समुदायों के लोग मोदी का स्वागत करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री गंगा आरती में शामिल होंगे। वे शुक्रवार को काल भैरव और काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने के बाद अपना नामांकन दाखिल करेंगे।

मोदी का रोड शो बीएचयू के सिंह द्वार पर स्थित पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। रोड शो लंका, अस्सी, भदैनी, शिवाला, सोनारपुरा, मदनपुरा, गोदौलिया के बाद दशाश्मेध घाट तक चेलगा। सड़क के दोनों किनारों पर बैरिकेडिंग की गई है, ताकि कोई सड़क के बीच में न आ पाए। सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इसके लिए 21 एडिशनल एसपी, 55 सीओ, 620 इंस्पेक्टर, 3100 कांस्टेबल, 12 कम्पनी पीएसी, 16 कंपनी पैरामिलिट्री फोर्स, 150 महिला सिपाही समेत एसपीजी और एलआईयू की टीमें चप्पे-चप्पे पर मौजूद रहेंगे।

Thursday, April 11, 2019

英国脱欧:欧盟同意延期至10月底有何考量

各国领袖周二召开峰会至凌晨,会后宣布同意英国的“脱欧”时间延期,并会在6月作出第一次评估。欧洲理事会主席唐纳德·图斯克(Donald Tusk) 在会后记者会表示,此次延期为弹性延期,英国可以在期间做出任何决定。但他“向英国朋友发出信息”,“这一次,请別再浪费时间了!”

英国首相特里莎·梅(Theresa May,又译文翠珊)表示接受提议。她强调英国仍希望尽速离开欧盟。

周二在布鲁塞尔举行的欧盟高峰会,历时五个小时通过决议。

梅首相之前告诉过欧盟各国领袖,她希望将英国脱欧日期从本周五推迟到6月30日。她又说,如果英国议会批准退出协议,她可选择再将脱欧日期提前。

图斯克说,“此次延期决议完全由英国负责;他们仍然可以撤回协议,终止延期。”他又称英国也可以重新考虑其战略,或者选择撤销《第50条》(Article 50),完全撤销英国脱欧的决定。

“让我告诉我的英国朋友:此次延期与我预期相同,是具有弹性的延期。但时间比我的预期要短一些,但仍足以让英国找到最好的解决方案。”他说。

欧盟委员会(European Commission )主席让-克洛德·容克(Jean-Claude Juncker)回应:“英国可能还是会参加欧洲议会选举(European Election)——这似乎有点奇怪,但规则是规则,我们必须尊重欧洲法律,然后我们才能知道接下来的情况。”

特里莎·梅在会后对记者表示,如果英国议会在5月的前三周内撤回此项延期协议,那么英国就无需参加欧洲议会选举。

梅首相称,在她的延期协议获得该国议会批准之前,英国将持续拥有欧盟正式的会员权利和义务。

她补充说:“我知道许多人都十分沮丧,但我不得不要求延期”, “遗憾的是,还没能够说服议会。”

这是特里莎·梅第二次到欧盟总部要求延长脱欧期限。目前为止,英国国会表决拒绝了特里莎·梅去年与欧盟达成的脱欧协议,而下议院也投票反对无协议脱欧(no deal brexit)。

欧盟内部之前在提供英国脱欧延期方案存有分歧,但他们必须依法达成协议并作出决定。

BBC记者凯蒂亚·阿德乐(Katya Adler)分析,此次延期到可说是法国总统马克龙(Emmanuel Macron)胜利的一天,因为他是谈判会议室中发言最强硬的一人。

BBC事实核查记者克里斯·莫里斯(Chris Morris)

欧洲理事会主席唐纳德·图斯克之前曾敦促欧盟领导人,在讨论推迟脱欧的最新请求时不要羞辱特里莎·梅。但其他27个欧盟国家仍可能对谈判期间的任何延期施加严厉条件,以确保各国能保护到自己的利益。

欧盟一开始主要是要求英国履行5月23日如期举行欧洲议会选举的承诺——如果那时英国尚未脱欧。

布鲁塞尔峰会(10)的结论草案却表示,如果英国未能举行欧洲议会选举,英国将在6月1日自动脱欧 ,甚至是以无协议脱欧方式脱欧。

可是,即使英国举行了欧洲议会选举,英国选出的欧洲议会议员也将参加7月欧洲新议会的第一届会议。一些欧盟代表担心“不满的英国代表可能会在欧洲议会上阻止欧盟在一系列重要问题上取得进展。”

不同欧洲成员国对这种威胁的严重程度有不同看法,但这顾虑肯定是欧盟内部正讨论的关键问题之一。特里莎·梅曾承诺,英国仍将是一个“建设性和负责任"的成员,并恪守其与欧盟其他国家真诚合作的责任。”

在布鲁塞尔,这是一个具有重要意义的宣称,但它无法约束日后任何一个英国政府会以此与欧盟合作。

首先,欧盟政治结构顶端将有一个重要变化。欧盟委员会的新主席必须由欧盟领导人提名,并经欧洲议会批准。由11月1日起接替正在退休的让-克洛德·容克。12月1日,一位新的欧洲理事会主席将接替图斯克上任。

但是,这两项任命都将来自“有限制性多数表决制。” 换言之,不需要得到所有欧盟成员国一致同意。这将限制不开心的英国政府有能力阻止欧盟关键事务。

“我们一直都戒慎恐惧。”一位欧盟高级官员说,“虽然实际上,未来一年你没办法否决太多事。” 但是,欧盟还有其他一些重要事要做,尤其是2021至2027欧盟未来7年预算的规模和形态,不希望未来还有英国阻扰。

新委员会的预算谈判将如火如荼展开,至少一年内不会作出决定,但预算需得到全体同意。这就是为什么任何英国脱欧延期的时间,几乎肯定会如图斯克所说的那样“不超过一年”的原因之一。

Tuesday, April 2, 2019

बदल गया 'भगवान का अपना देश'

किसानों की खुदकुशी के मामले केरल में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है क्योंकि इस साल अब तक सिर्फ़ इडुक्की ज़िले में ही छह किसानों ने क़र्ज़ की वजह से आत्महत्या कर ली.

राज्य में सत्तारूढ़ वाम मोर्चे को छोड़ भाजपा और कांग्रेस भी अब किसानों की आत्महत्याओं को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं. राजनीतिक दल आत्महत्याओं को इसलिए भी मुद्दा बनाना चाहते हैं क्योंकि इस राज्य में लोकसभा की 20 सीटें हैं.

पिछले लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी 'यूडीएफ' ने 20 में से 12 सीटें जीतीं थीं जबकि वाम मोर्चे ने आठ. इस बार भारतीय जनता पार्टी भी लोकसभा चुनावों में अपना खाता खोलने की आस लगाए हुए है.

भारतीय जनता पार्टी ने कई मुद्दों को लेकर एक राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश ज़रूर की है, लेकिन राज्य में अचानक से तेज़ हुए किसानों की आत्महत्या के मामलों ने मुद्दा बदल दिया है. पिछले साल आई बाढ़ के छह महीनों के बाद भी केरल पूरी तरह से उबर नहीं पाया है.

वैसे तो बाढ़ की चपेट में पूरा राज्य ही था, लेकिन इसने मध्य और उत्तरी इलाक़ों में ज़्यादा तबाही मचाई थी. बाढ़ की चपेट में यहाँ के बाँध और एयरपोर्ट भी आ गए थे. इस दौरान किसानों का भी ख़ूब नुक़सान हुआ जो क़र्ज़ में डूबते चले गए और पिछले दो महीनों के दौरान इस राज्य के कई किसानों ने आत्महत्या कर ली.

इनमें से मसालों की पैदावार कर रहे ज़्यादातर किसानों ने बैंकों से क़र्ज़ लिया था. लेकिन हैरानी वाली बात ये है कि कुछ बैंक, मृत किसानों के परिवारवालों को क़र्ज़ अदायगी के लिए आज भी नोटिस भेज रहे हैं. किसानों की आत्महत्याओं का सबसे ज़्यादा असर इडुक्की ज़िले में हुआ जो पश्चिमी घाट की ख़ूबसूरत वादियों में बसा है.

इस इलाक़े को काली मिर्च, इलाइची और मसालों की खेती के लिए जाना जाता रहा है. दूर-दूर तक मसालों की खेती इडुक्की की रौनक बढ़ा देती है. ये वो इलाक़े हैं, जिन पर केरल वासियों को गर्व है.

लेकिन किसानों की आत्महत्याओं ने इस गर्व को उनके विलाप में बदलना शुरू कर दिया है.

इसी ज़िले के मेरिगिरी गाँव में मातम का माहौल है. यहाँ के 37 वर्षीय किसान संतोष की आत्महत्या के बाद उनके घर में कमाने वाला कोई नहीं बचा है. उनकी वृद्ध माँ ओमना, अपनी बहू और पांच साल के पोते के साथ इस घर में रहती हैं.

बीबीसी से बात करते हुए वो रह-रह कर बिलख उठती हैं. उन्हें अफ़सोस है कि बेटे के मरने के बावजूद, बैंक से नोटिस पर नोटिस आते ही जा रहे हैं.

वो कहती हैं, "मेरा बेटा, संतोष, 37 साल का था. वो बहुत दिनों से खेती कर रहा था. उसने बेहतर खेती के लिए बैंकों से क़र्ज़ लिया था जिसे वापस करना मुश्किल हो रहा था. उसने आत्महत्या कर ली."

ओमना का कहना था कि जैसे-जैसे ज़रूरत पड़ती गई, संतोष ने क़र्ज़ लेना शुरू कर दिया. मसालों की खेती में किसानों को पैसों की ज़रूरत पड़ती रहती है. कुल मिलाकर उन पर 25 लाख रुपये का क़र्ज़ चढ़ गया. उन्हें इस बार अच्छी फसल होने की उम्मीद थी. लेकिन बाढ़ ने सब कुछ बर्बाद कर दिया. बाढ़ के दौरान सिर्फ इडुक्की ज़िले में ही भूस्खलन की कई घटनाएं भी हुईं. इन घटनाओं में सबसे ज़्यादा नुक़सान मसालों की खेती कर रहे किसानों को हुआ.

ओमना ने बताया, "हमारी मसालों की खेती थी. सब ख़त्म हो गया. फिर बैंक से अधिकारी आए. वो क़र्ज़ के पैसे वापस मांग रहे थे. मेरा बेटा 20 हज़ार रुपये लेकर गया. लेकिन वो एक लाख मांग रहे थे. बाढ़ ने सब तबाह कर दिया है. बुढ़ापे में अब हमारा कोई सहारा नहीं बचा."

ढाई साल पहले बिजली का झटका लगने से ओमना के पति की मौत हो गई थी और उसके बाद से संतोष पर ही पूरे घर की ज़िम्मेदारी थी.

कुछ ही दूर पेरिंचनकुट्टी गाँव में शिबू का भी घर है. उनके पिता सहादेवन भी मसाले की खेती करते थे. पिछले साल आई बाढ़ ने अच्छी फसल की उनकी उम्मीदों पर ऐसा पानी फेरा कि उन्होंने भी आत्महत्या कर ली.

शिबू ने बताया कि उनके पिता ने बैंक से पहले तो 12 लाख रुपये का क़र्ज़ लिया था फिर दो लाख रुपये और लिए. कुल मिलाकर बैंकों से 14 लाख रुपये लिए थे.

अपने पिता की तस्वीर हाथ में लिए बैठे शिबू को समझ नहीं आ रहा कि अब क़र्ज़ कैसे चुकाया जाए क्योंकि बैंक से नोटिस भी आ रहे हैं और अधिकारी भी. वो बताते हैं कि जनवरी की 24 तारीख़ को इडुक्की के को-ऑपरेटिव बैंक से उनके पिता को जब नोटिस मिला, तो वो काफ़ी उदास हो गए थे.

शिबू ने बताया, "पहले भी वो क़र्ज़ लेते रहे थे. कभी ऐसा नहीं हुआ कि उन्होंने किसी का क़र्ज़ वापस ना लौटाया हो. इस बार हालात बहुत ख़राब हो गए. बाढ़ ने सारे सपनों पर पानी फेर दिया. 27 जनवरी की शाम जब मैं और मेरे एक पड़ोसी ने उनके कमरे का दरवाज़ा खटखटाया तो अंदर से कोई जवाब नहीं मिला. दरवाज़ा अंदर से बंद नहीं था. हमने दरवाज़ा खोला और देखा कि मेरे पिता ने फँसी लगा ली थी."

Thursday, March 21, 2019

新西兰“天堂”梦醒?悲剧过后反思“移民乐园”

刚发生在新西兰的枪击事件震惊全球,理由不仅是白人枪手在两所清真寺滥杀无辜,50人丧命,更因为发生地是在宁静得似乎与世无争的新西兰。

新西兰总理杰辛达·阿德恩(Jacinda Ardern)周四(3月21日)召开记者会,宣布新西兰将出台一系列枪枝管控法案,禁止大众拥有军事性用途的半自动枪枝(Military Style Semi-Automatics ) 及突击步枪(assault rifles)。

新西兰政府估计该国有150万枪枝流通,有执照的武器只有24万支。

这次针对少数族裔的暴力,也让人们重新审视新西兰内部的种族问题,“移民天堂”面临重新洗牌。

人以群分?新西兰的我们与他们
攻击事件发生当日,阿德恩迅速在媒体上发表评论指称凶嫌为“恐怖攻击”,除了哀悼之外,表示“我们”亦即新西兰,不会被“你们”也就是种族主义者击垮,“我们”新西兰会继续走包容的路。

然而,新西兰威灵顿维多利亚大学人类学系教授凯瑟琳·川朵尔(Catherine Trundle)批评称,阿德恩的表态忽略了新西兰的种族歧视,“这名澳大利亚白人主嫌也是从‘我们’的社会中变成了种族主义恐怖分子”。

川朵尔指出,种族主义者以及暴行早就存在于新西兰。比如,信奉“白人至上”的政党在此次悲剧发生的基督城(Christchurch)选举中也拿过2%的选票,另外大大小小的种族攻击事件也时有发生。

她认为,需要考量的不是将恐怖攻击者定义为“非我族类”,而是新西兰社会为何没有从来没有严肃地处理近年来兴起的种族主义极端份子。在社会氛围解放的新西兰社会,那些种族主义者的言论多半被视为笑话,众人不屑一顾。

研究新西兰移民与社会网络的新西兰国家人口与经济分析中心(NIDEA)主任法兰西斯柯林斯(Francis Collins)教授告诉BBC中文,新西兰历史上是个殖民国家,当地原住民毛利人(Māori)两百年来受英国与白人殖民统治,这个殖民历史的伤口,新西兰社会尚未处理完善,接着许多社会歧视,包含就业、文化以及教育上还是时有耳闻

柯林斯教授解释,新西兰在西方,特别是英国海外殖民历史上,一直被包装成“天堂”以及安全的“海角乐园”形象。到了近代,则是被以宜居,绿色安全等市场论述包装,吸引移民。

然而,柯林斯对BBC中文表示,此次攻击说明,这些针对少数族群歧视甚或攻击的恶行,一直也存在于有“天堂乐园”之称的新西兰。

此次种族攻击事件,也引起当地华人紧张。根据官方统计,目前新西兰约有20万华人。自小移民奥克兰(Auckland)20年的台湾移民张小姐告诉BBC中文,此次事件发生,让她与家人十分震惊。

据分析,新西兰政府与社会在1990年代对于华人移民十分排斥,甚或歧视。当时的执政党一直对华人移民十分不友善,社会上也批评移民抢走新西兰人工作机会。

2003年之后,新西兰开始重新检讨,并将自己打造为开放以及自由的国家,移民条件改善。

新西兰现在是唯一开放30岁以下中国公民申请旅游打工签证(Working Holiday Visa)的国家,每年约有1000位中国公民申请此签证。

根据2013年的官方统计,华人虽然平均教育程度高于新西兰白人,但收入却低于后者。

张小姐告诉BBC中文,移民一开始对于新西兰确实会有一些美好的想像,包括良好教育、优美的自然环境及友善的人民。但在接触到种族歧视后带来许多情感幻灭。张小姐强调,新西兰还是多元文化的表率,多数国民对待移民十分友善,只是偶尔会遇到一些种族歧视。

柯林斯称,华人移民还是面对许多就业以及教育领域中的歧视。他强调,此次悲剧敲响了新西兰面对种族主义的警钟。他说,新西兰总体处理此次50人无辜丧命的悲剧十分恰当,然而,把新西兰描绘成移民天堂确实是个虚构。

2017年,奥克兰华人与印度团体便联合上街游行,抗议针对少数族裔的抢劫攻击案件日渐严重。

居住在奥克兰的台湾移民艾瑞克告诉BBC中文说,此次悲剧证明新西兰与其他国家在种族主义阴影下一样脆弱。但他不认为此次单一事件证明了新西兰种族主义情形严重,他认为这是媒体过度反应。此次事件让新西兰人不分你我,关心彼此。

Thursday, March 7, 2019

कभी इधर-कभी उधर, ये हैं भारतीय राजनीति के 9 सबसे बड़े अवसरवादी दल!

देश में करीब 35 ऐसी पार्टियां हैं जो लोकसभा चुनावों से पहले गठबंधनों में शामिल होती हैं. या तो ये पार्टियां बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए में या फिर कांग्रेस नेतृत्व वाले यूपीए गठबंधन से चुनाव पूर्व सीटों पर तोलमोल तो करती हैं, लेकिन आमतौर पर हर चुनाव में एक गठबंधन या उसके आसपास वाली पार्टियों से समझौता करते हैं. लेकिन इन 35 पार्टियों में 9 ऐसी हैं जो दो धुर-विरोधी गठबंधनों के बीच बेरोकटोक चुनाव पूर्व समझौता करती हैं.

चार लोकसभा चुनावों गठबंधन से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि तमिलनाडु की चार प्रमुख राजनीतिक पार्टियां पहले पायदान पर हैं. यह खिताब इसलिए है कि ये पार्टियां लगभग सभी गठबंधन, यूपीए और एनडीए के अलावा तीसरे मोर्चे तक से सीटों का समझौता कर चुकी हैं. समझौते के बाद अगर चुनावी नतीजे ठीक नहीं आए तो अगले चुनाव में ये पार्टियां दूसरे गठबंधन का हिस्सा बन जाती हैं.

1999 में डीएमके, एमडीएमके और पीएमके ने बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ मिलकर तमिलनाडु की 31 सीटों पर चुनाव लड़ा और 21 पर जीत हासिल की. जबकि चौथी बड़ी पार्टी एआईएडीएमके कांग्रेस नेतृत्व वाले यूपीए के साथ चुनाव लड़ी और 10 सीट जीत पाई.

एआएईडीएमके

लेकिन अगले लोकसभा चुनावों में (2004) में इन सभी पार्टियों ने पलटी मार ली. डीएमके, एमडीएमके और पीएमके यूपीए के साथ तो एआईएडीएमके बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए का दामन थाम लिया. हालांकि यूपीए वाली पार्टियों को तो फायदा हुआ, लेकिन एआईएडीएमके का दांव उलटा पड़ा तमिलनाडु की लोकसभा सीट में कोई खाता तक नहीं खोल पाई.

जबकि इसी चुनाव में यूपीए के साथ आने पर डीएमके ने 16 सीट, पीएमके ने 5 सीट और एमडीएमके ने 4 लोकसभा सीट जीत लिया.

2004 में खाता नहीं खुलने के बाद एआएईडीएमके ने 2009 में नए गठबंधन तीसरे मोर्चे से हाथ मिला लिया और 9 सीट जीत गई. लेकिन 2014 में एआईएडीएमके अकेले चुनाव लड़ी और तमिलनाडु की 39 में से 37 सीटों पर रिकॉर्ड जीत हासिल की. एनडीए के साथ जुड़ने वाली बाकी तमिल पार्टियां मोदी हवा के बावजूद भी दो सीट पर सिमट गई. 2014 में पीएमके और बीजेपी को मात्र एक-एक सीट मिल पाई. अब एआईएडीएमके ने यूपीए, एनडीए, थर्ड फ्रंट से होते हुए 2019 में फिर से एनडीए के साथ मिलकर चुनाव लड़ने जा रही है.

पिछड़ी जातियों के भीतर वोटबैंक में दखल रखने वाली पार्टी के वोट शेयर से लेकर सीट तक लगातार घटती रही. 2009 में  तो पीएमके जीरो पर सिमट गई. उस वक्त पीएमके ने थर्ड फ्रंट के साथ चुनाव लड़ा था.

डीएमके

गठबंधन की राजनीति की शुरुआत 1999 से मानी जाती है. इस शुरुआती दौर में तमिलनाडु की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी डीएमके ने एनडीए के साथ चुनाव लड़ा, लेकिन ठीक अगले चुनाव यानी 2004 में कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन यूपीए में शामिल हुई और 16 सीट पर जीत हासिल की. लगातार सीट में फायदा देखते हुए डीएमके ने 2009 का चुनाव भी यूपीए के साथ लड़ा और 18 सीट पर जीत हासिल की. हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में डीएमके ने एआईएडीएमके के तर्ज पर अकेले चुनाव लड़ा और खाता तक नहीं खोल पाई. हालांकि डीएमके 27 सीटों पर दूसरे नंबर की पार्टी थी.

तमिलनाडु की राजनीति में चौथा बड़ा दल एमडीएमके की भी राजनीति पीएमके की तरह गठबंधनों के बीच झूलती रही है. 1999 मे एनडीए, 2004 में यूपीए और 2009 में तीसरा मोर्चा और 2014 में फिर एनडीए के साथ चुनाव लड़ी. 2014 में मोदी की हवा थी बावजूद उसके एमडीएमके तमिलनाडु में खाता तक नहीं खोल पाई.

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस ने 1999 और 2004 का चुनाव एनडीए के साथ मिलकर लड़ा. पहली बार 8 सीट मिली, लेकिन दूसरी बार केवल दो सीट. ममता ने तीसरे चुनाव यानी 2009 में यूपीए से हाथ मिलाया और 19 सीटों पर जीत हासिल कर ली. उसके बाद 2014 में तृणमूल किसी भी गठबंधन के साथ नहीं गई. लेकिन पार्टी 2019 के चुनावों के लिए एक बार फिर गठबंधन का हिस्सा बनने जा रही है. मौजूदा संकेतों के मुताबतिक ममता बनर्जी 2019 का चुनाव महागठबंधन के नाम पर लड़ सकती हैं.

Thursday, February 28, 2019

ट्रम्प ने कहा- भारत और पाक से अच्छी खबर आ रही है, मसूद पर प्रतिबंध के लिए यूएन में 3 देशों का प्रस्ताव

नई दिल्‍ली. वियतनाम में उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग से मुलाकात करने गए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत-पाक तनाव पर बड़ा बयान दिया। ट्रम्प ने विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच युद्ध के हालात जल्द ही खत्म हो जाएंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि भारत-पाक से उनके पास अच्छी खबर आ रही है। इस बीच पुलवामा हमले की जिम्मेदारी लेने वाले आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्‍मद के चीफ मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र (यूएन) की सुरक्षा परिषद में अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने प्रस्ताव पेश किया।

ट्रम्प ने कहा- हम भारत और पाकिस्तान की मदद करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। हम दोनों को रोकने की कोशिश कर रहे हैं और हमारे पास वहां से अच्छी खबर आ रही है। उम्मीद है कि तनाव जल्द ही खत्म हो जाएगा। यह लंबे समय से चला आ रहा है और अब ये खत्म हो जाएगा।

मसूद पर प्रतिबंध के प्रस्ताव पर चीन चुप

मसूद पर प्रतिबंध लगाए के लिए यूएन में पेश किए गए प्रस्ताव पर चीन ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन ने अपने प्रस्ताव में मसूद की वैश्विक यात्राओं पर प्रतिबंध लगाने और उसकी सभी संपत्ति फ्रीज करने की मांग भी रखी है। 14 फरवरी को कश्मीर के पुलवामा में हुए फिदायीन हमले में भारतीय सुरक्षाबलों के 40 जवान शहीद हो गए थे। जैश ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। 

1 मार्च को फ्रांस बन जाएगा सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष
फ्रांस सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य है और उसके पास वीटो पॉवर है। एक मार्च को इसकी अध्यक्षता इक्वेटोरियल गुयाना से फ्रांस के पास चली जाएगी।

3 बार पहले भी पेश हुआ प्रस्ताव, हर बार चीन ने अड़ंगा लगाया

मसूद पर प्रतिबंध लगाने के लिए पिछले 10 साल में चौथी बार प्रस्ताव लाया गया है। 2009 में भारत ने प्रस्ताव रखा था। 2016 में भारत, अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन के समर्थन से दूसरी बार प्रस्ताव लाया। तीसरी बार 2017 में भी ऐसा ही प्रस्ताव लाया गया। चीन ने हर बार इसे तकनीकी तौर पर गलत बताकर रोक दिया।

पुलवामा हमले के बाद भी चीन का अड़ियल रवैया
पुलवामा हमले की जिम्मेदारी जैश ने ली। इसके बाद चीन ने कहा कि हम किसी भी तरह के आतंकवाद का विरोध करते हैं। लेकिन जहां तक मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने का मामला है तो हम इसे जिम्मेदार तरीके से देखेंगे।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन समेत 5 स्थाई सदस्य
अमेरिका, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य हैं। इनके अलावा अर्जेंटीना, बहरीन, ब्राजील, कनाडा, गैबोन, गाम्बिया, मलेशिया, नामीबिया, नीदरलैंड्स और स्लोवेनिया इसके अस्थाई सदस्य हैं।

Wednesday, January 30, 2019

सिटिजनशिप बिल से धुले NRC के फायदे, पूर्वोत्तर में घिरी मोदी सरकार

असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर केंद्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पक्ष में खास तौर पर पूर्वोत्तर के राज्यों में जो माहौल बना था, वो नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 के विरोध की आंच में खत्म होता दिख रहा है. देश में होने वाले आगामी चुनाव में नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (NEDA) के सहारे चुनावी नैया पार कराने की योजना बना रही बीजेपी के लिए यह विधेयक गले की हड्डी बनता जा रहा है. क्योंकि बिहार में बीजेपी की सहयोगी जेडीयू समेत पूर्वोत्तर के घटक दल इस बिल का एक स्वर में विरोध कर रहे हैं.

नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 को लेकर मंगलवार को गुवाहाटी में हुई बैठक में पूर्वोत्तर के 11 राजनीतिक दलों ने एकमत से इस बिल का विरोध किया है. इससे पहले असम में बीजेपी की अहम सहयोगी असम गण परिषद (AGP) पहले ही अपना समर्थन वापस ले चुकी है. विधेयक के विरोध में हुई इस बैठक में मेघालय के मुख्यमंत्री और नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के अध्यक्ष कोनराड संगमा और मिजोरम में मुख्यमंत्री और मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) के नेता जोरमथांगा ने हिस्सा लिया. इनके अलावा इस बैठक में जेडीयू ने केसी त्यागी समेत नागालैंड की नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (NDPP), त्रिपुरा की इंडीजीनस पिपुल्स फ्रंड ऑफ त्रिपुरा (IPFT), सिक्किम की सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (SDF), के अलावा अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मणिपुर से NPP के नेता शामिल हुए.

इन नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलकर नागरिकता संशोधन विधेयक पर अपना विरोध दर्ज कराने की बात कही. इसके अलावा जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा कि एनडीए की अन्य सहयोगी शिवसेना और आकाली दल भी इस विधेयक के खिलाफ हैं. यदि कांग्रेस राज्यसभा में इस विधेयक के विरोध में वोट करती है तो यह पास नहीं होगा.

बीजेपी के लिए भावनात्मक मुद्दा

गौरतलब है कि असम में NRC की मसौदा सूची जारी होने के बाद अवैध घुसपैठियों की समस्या से जूझ रहे पूर्वोत्तर के तमाम राज्यों द्वारा उनके राज्य में NRC लागू करने की मांग होने लगी थी. केंद्र की बीजेपी सरकार के इस कदम को जबरदस्त समर्थन हासिल हुआ. दरअसल बांग्लादेश से आए मुस्लिम घुसपैठियों को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बता कर बीजेपी इस मुद्दे को भावनात्मक रूप देती रही है. वहीं बीजेपी ने इन चुनावों में पड़ोसी देशों में उत्पीड़न का शिकार होकर भारत आने वाले हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने अपने घोषणापत्र में किया था. पूर्वोत्तर में लोकसभा की 25 सीटें आती हैं, जिसपर बीजेपी का खास फोकस है. दरअसल बीजेपी उत्तर और पश्चिम भारत में होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई इन सीटों से करना चाहती है. लेकिन बीजेपी के इस प्लान को धक्का लग सकता है क्योंकि नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध कर रहे अधिकतर क्षेत्रीय दल अपने-अपने राज्यों में बीजेपी के साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं.

नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2016 क्या कहता है?

दरअसल, नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 के माध्यम से सरकार अवैध घुसपैठियों की परिभाषा फिर से गढ़ना चाहती है. इसके जरिए नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन कर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदाय के अवैध घुसपैठियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है. हालांकि इस विधेयक में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में उत्पीड़न का शिकार मुस्लिम अल्पसंख्यकों (शिया और अहमदिया) को नागरिकता देने का प्रावधान नहीं है. इसके आलावा इस विधेयक में 11 साल तक लगातार भारत में रहने की शर्त को कम करते हुए 6 साल करने का भी प्रावधान है. 

नागरिकता अधिनियम, 1955 के मुताबिक वैध पासपोर्ट के बिना या फर्जी दस्तावेज के जरिए भारत में घुसने वाले लोग अवैध घुसपैठिए की श्रेणी में आते हैं.

पूर्वोत्तर में क्यों हो रहा है विरोध?

जहां नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 गैर मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता देने की बात करता है, NRC के मामले में ऐसा नहीं है. NRC के तहत 24, मार्च 1971 से भारत में अवैध रूप से रह रहे सभी धर्म के लोगों को चिंहित कर इन्हें वापस भेजने की बात है. इस लिहाज से यह नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016, NRC के सिद्धांत को उलट देता है, क्योंकि यह सभी गैर-मुस्लिमों को नागरिकता देने के उद्देश्य से लाया गया है. पूर्वोत्तर में एनडीए के सहयोगी इस विधेयक का विरोध इस लिए कर रहे हैं क्योंकि वे इसे अपनी सांस्कृतिक, सामाजिक और भाषाई पहचान के साथ खिलवाड़ समझते हैं. जिसके लिए ये दल निरंतर संघर्ष करते आए हैं.

इन दलों की दूसरी बड़ी चिंता यह भी है कि नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 लागू होने से NRC के तहत चिन्हित अवैध शरणार्थी या घुसपैठिओ संबंधी अपडेट कोई मायने नहीं रखेंगे. तीसरा बड़ा मुद्दा यहा है कि यह विधेयक धर्म के आधार पर नागरिकता प्रदान करने की बात करता है. जबकि NRC में एक निश्चित समय सीमा के बाद से भारत में अवैध तौर पर रह रहे सभी अवैध घुसपैठियों की पहचान कर वापस भेजने की बात है.

Tuesday, January 22, 2019

YONO SBI 20under20 अवार्ड्स में उत्तर भारत का दबदबा

देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का नए युग का डिजिटल बैंक YONO अपनी सफलता का एक साल पूरा कर चुका है. इस मौके का जश्न पूरे देश के साथ मनाने के लिए एसबीआई ने YONO SBI 20under20 अवार्ड की आधारशिला रखी और देशभर से 20 साल से कम आयु के ऐसे युवाओं को चुना जो इस कम उम्र में भी एक मुकाम हासिल कर चुके हैं.

कई क्षेत्रों से जानी-मानी हस्तियों को लेकर गठित की गई जूरी ने कड़ी खोजबीन के बाद देशभर से 20 साल से कम 60 पुरुषों और महिलाओं की एक सूचि तैयार की जिनका YONO SBI 20under20 अवार्ड के लिए नामांकन किया गया. इन 60 लोगों को अलग-अलग श्रेणियों (तीन नाम प्रति श्रेणी) के लिए नामांकन कर जनता की वोटिंग के लिए खोला गया है.

YONO SBI 20under20 अवार्ड का नामांकन निम्न श्रेणियों के लिए किया गया है- स्टूडेंट एचीवर, एक्टर, स्पोर्ट्स चैंपियन, आर्ट एंड लिटरेचर, प्रॉमिसिंग गेमचेंजर, सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर, परफॉर्मिंग आर्टिस्ट, डिसैबिलिटी चैंपियन, ग्लोबल इंडियन और ससटेनबिलिटी पायनियर.   

अवार्ड की इन श्रेणियों के लिए 60 लोगों का नामांकन करने वाली विशिष्ट जूरी में नैशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के प्रमुख दिलीप अस्बे, माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर शशी श्रीधरन, फेसबुक के पूर्व डायरेक्टर आनंद चंद्रशेखरन, एक्टर सोहा अली खान, यूएन गुडविल अंबैसडर दिया मिर्जा, सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर मल्लिका दुआ और स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट बोरिया मजूमदार शामिल हैं.

वहीं अवार्ड के लिए नामांकन एकत्र करने का काम एसबीआई के नॉलेज पार्टनर KPMG ने किया. YONO SBI 20under20 अवार्ड में सहायक एजेंसी के तौर पर, देश की शीर्ष इंफ्लूएंसर औऱ कंटेंट एजेंसी,The Network ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है.

अवार्ड के लिए चयनित 60 नामांकनों में 15 नामांकन दक्षिण भारत के राज्यों से,17 नामांकन उत्तर भारत के राज्यों से,14 नामांकन पश्चिमी भारत के राज्यों से,5 नामांकन सेंट्रल इंडिया और 3 नामांकन पूर्वी राज्यों से किया गया है. वहीं ग्लोबल इंडियन श्रेणी के लिए 6 नामांकन किए गए हैं.

एसबीआई के प्रवक्ता, चीफ मार्केटिंग अफसर दिनेश मेमन ने कहा, “YONO SBI 20under20 अवार्ड की शुरुआत डिजिटल बैंकिंग प्लैटफॉर्म YONO के सफलतापूर्क एक साल पूरा करने और अलग-अलग क्षेत्रों में सफलता का मूलमंत्र पा चुके युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए किया गया है.”

जूरी में शामिल एक्टर दिया मिर्जा ने कहा, “YONO SBI 20under20 अवार्ड का हिस्सा बनना बेहद रोमांचक रहा. इस प्लैटफॉर्म पर देश के बेहतरीन और सफल युवाओं से मुलाकात का मौका मिला. वहीं मेरे साथ जूरी के अन्य सदस्य अपने-अपने क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल कर चुके हैं, लिहाज़ा उम्मीद है कि हम सभी ने मिलकर अच्छा काम किया है. आप भी इस प्लैटफॉर्म के जरिए चुने गए युवाओं को अपना वोट देकर उनका प्रोत्साहन सुनिश्चित करें.”

Thursday, January 10, 2019

中国之行金正恩与习近平就美朝峰会达成共识

朝鲜最高领导人金正恩在突如其来的第四度赴华访问后返回朝鲜,同时带回了习近平对可能到来的第二次美朝领导人峰会的支持。有消息称,金正恩向习近平发出访朝邀请,习近平已经接受。

中国新华社报道称,习近平表示支持朝美举行首脑会晤并取得成果,希望朝鲜和美国“相向而行”。

美国总统特朗普去年6月与金正恩在新加坡举行会谈,但此后朝鲜无核化进展几乎停滞。

中国是朝鲜主要盟友及关键贸易伙伴。习近平称,中国将支持有关各方“通过对话解决各自合理关切”,愿意为维护朝鲜半岛和平稳定,实现半岛无核化和地区和平发挥“积极建设性作用”。

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习近平访朝计划
2018年3月,金正恩首次正式访问中国,在会见韩国总统文在寅及特朗普前率先与习近平见面。此次是他一年内第四次访华。据新华社报道,三天行程内,金正恩与夫人李雪主受到习近平及夫人彭丽媛的晚宴接待并共同欣赏文艺演出。金正恩与李雪主还参观了中药品牌北京同仁堂旗下一家制药厂,考察相关传统工艺及现代化中药加工程序。

今年是中朝建交70周年。朝中社表示,金正恩此次与习近平会谈期间邀请习近平访朝,而习近平“欣然接受”,并对有关计划进行通报。

而韩联社引用北京消息灵通人士表述称,预计习近平会在第二次美朝领导人峰会后访问朝鲜,但不会晚于10月6日中朝建交70周年纪念日。

中国外交部发言人陆慷10日在例行发布会上对此回应称,中朝之间有高层互访传统,中国愿与朝鲜加强高层交往,扩大交流合作,有相关消息会及时发布。

无核化进展缓慢

金正恩在今年的新年讲话中曾重申实现无核化的意志,但同时警告称如果美国继续制裁,朝鲜将不会继续前行。

朝中社报道称,中国坚持朝鲜的这一立场。

“习近平表示,朝方主张的原则性问题是正当要求,朝方的合理关切应当给予解决,”朝中社表示。

目前第二次“特金会”时间地点尚未确定,但文在寅表示将会“尽快”举行。

文在寅自去年以来一直扮演美国和朝鲜之间的中间人。周四他在韩国首都首尔举行新年记者会,会上文在寅表示已向金正恩致亲笔信,韩国将继续就对朝制裁问题与美国进行合作。他还称,由于解决对朝制裁问题是朝鲜去核的关键,为加快解决对朝制裁,朝鲜需要在实质性的去核措施上行动更加“果断”。

在去年首次美朝领导人峰会上,特朗普与金正恩签署文件承诺朝鲜半岛实现无核化,但没有对此具体的时间表和路线图。此后朝鲜无核化没有取得太大进展。

此前由于朝鲜推进核武器和导弹项目,联合国出台措施制裁朝鲜。朝鲜希望美国可以放开对朝制裁,称在其无核化的同时,美国需要采取相应行动。朝鲜已拆除一座核试验基地及一处重要导弹发动机制造设施。