Thursday, April 25, 2019

फिदायीन हमलावर अमीर कारोबारी था, पुलिस घर पहुंची तो छोटे भाई ने भी खुद को उड़ा लिया

कोलंबो. यहां की फाइव स्टार शांगरी-ला होटल में फिदायीन हमला करने वाले इंशाफ इब्राहिम (33) की तांबे की फैक्ट्री थी। धमाके के बाद जब पुलिस उसके घर पर छापा मारने पहुंची तो छोटे भाई इल्हाम (31) ने भी खुद को बम से उड़ा लिया। इसमें इल्हाम की पत्नी और 3 बच्चों की भी मौत हो गई। रॉयटर्स न्यूज एजेंसी ने एक सूत्र के हवाले से यह जानकारी दी है। 21 अप्रैल को श्रीलंका में हुए 8 धमाकों में 359 लोग मारे गए, जिनमें 10 भारतीयों समेत 39 विदेशी नागरिक थे।

गतिविधियों के बारे में पड़ोसियों को भी जानकारी नहीं थी
दोनों भाई कोलंबो के महावेला गार्डन्स इलाके के एक तीन मंजिला घर में रहते थे। उनके पड़ोस में रहने वाली फातिमा फजला के मुताबिक- वे सभ्य लोगों की तरह दिखते थे। हमें कभी अहसास भी नहीं हुआ कि वे आतंकी गतिविधियों में लगे हुए थे। महावेला गार्डन्स में अमीर लोग रहते हैं।

इंशाफ और इल्हाम के पिता मोहम्मद इब्राहिम को पूछताछ के लिए पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मोहम्मद मसालों के कारोबारी हैं और व्यापार जगत में रसूख रखते हैं। उनके छह बेटे और तीन बेटियां थीं।

‘मुस्लिमों पर संदेह किया जा रहा’
फजला ने बताया कि मोहम्मद इब्राहिम गरीबों को खाना-कपड़े देने के लिए मशहूर थे। हमें विश्वास नहीं होता कि उनके बच्चे ऐसा भी कर सकते हैं। इंशाफ-इल्हाम ने जो किया, उससे सभी मुस्लिमों को शक की नजर से देखा जा रहा है। पड़ोस में रहने वाली संजीवा जयसिंघे के मुताबिक- घटना से हैरान हूं। मैं सोच भी नहीं सकती कि वे ऐसे लोग थे।

परिवार के एक करीबी का कहना है कि इल्हाम खुलेतौर पर कट्टरपंथी विचारों का समर्थन करता था। वह स्थानीय चरमपंथी गुट नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) की बैठकों में शामिल होता था। इल्हाम की तुलना में इंशाफ उदार विचारों का था। वह भी गरीब लोगों की मदद किया करता था। इंशाफ ने एक आभूषण निर्माता की बेटी से शादी की थी और उसे पैसे की कोई कमी नहीं की थी।

राष्ट्रपति ने पुलिस प्रमुख और सुरक्षा सचिव से इस्तीफा मांगा

श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने देश के पुलिस प्रमुख पी. जयसुंदरा और सुरक्षा सचिव एच.फर्नांडो से इस्तीफा देने काे कहा है। राष्ट्रपति के करीबी अधिकारी ने न्यूज एजेंसी को बताया कि यह निर्णय रविवार को हुए बम-धमाकों को सुरक्षा में भारी चूक मानते हुए लिया गया। सिरिसेना ने मंगलवार शाम कहा था कि अगले 24 घंटे में सुरक्षाबलों के प्रमुख बदले जाएंगे।

वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद अपना रोड शो शुरू किया। वे यहां से दूसरी बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। 7 किलोमीटर लंबा रोड शो दशाश्वमेध घाट पर खत्म होगा। इस दौरान अलग-अलग समुदायों के लोग मोदी का स्वागत करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री गंगा आरती में शामिल होंगे। वे शुक्रवार को काल भैरव और काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करने के बाद अपना नामांकन दाखिल करेंगे।

मोदी का रोड शो बीएचयू के सिंह द्वार पर स्थित पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। रोड शो लंका, अस्सी, भदैनी, शिवाला, सोनारपुरा, मदनपुरा, गोदौलिया के बाद दशाश्मेध घाट तक चेलगा। सड़क के दोनों किनारों पर बैरिकेडिंग की गई है, ताकि कोई सड़क के बीच में न आ पाए। सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इसके लिए 21 एडिशनल एसपी, 55 सीओ, 620 इंस्पेक्टर, 3100 कांस्टेबल, 12 कम्पनी पीएसी, 16 कंपनी पैरामिलिट्री फोर्स, 150 महिला सिपाही समेत एसपीजी और एलआईयू की टीमें चप्पे-चप्पे पर मौजूद रहेंगे।

Thursday, April 11, 2019

英国脱欧:欧盟同意延期至10月底有何考量

各国领袖周二召开峰会至凌晨,会后宣布同意英国的“脱欧”时间延期,并会在6月作出第一次评估。欧洲理事会主席唐纳德·图斯克(Donald Tusk) 在会后记者会表示,此次延期为弹性延期,英国可以在期间做出任何决定。但他“向英国朋友发出信息”,“这一次,请別再浪费时间了!”

英国首相特里莎·梅(Theresa May,又译文翠珊)表示接受提议。她强调英国仍希望尽速离开欧盟。

周二在布鲁塞尔举行的欧盟高峰会,历时五个小时通过决议。

梅首相之前告诉过欧盟各国领袖,她希望将英国脱欧日期从本周五推迟到6月30日。她又说,如果英国议会批准退出协议,她可选择再将脱欧日期提前。

图斯克说,“此次延期决议完全由英国负责;他们仍然可以撤回协议,终止延期。”他又称英国也可以重新考虑其战略,或者选择撤销《第50条》(Article 50),完全撤销英国脱欧的决定。

“让我告诉我的英国朋友:此次延期与我预期相同,是具有弹性的延期。但时间比我的预期要短一些,但仍足以让英国找到最好的解决方案。”他说。

欧盟委员会(European Commission )主席让-克洛德·容克(Jean-Claude Juncker)回应:“英国可能还是会参加欧洲议会选举(European Election)——这似乎有点奇怪,但规则是规则,我们必须尊重欧洲法律,然后我们才能知道接下来的情况。”

特里莎·梅在会后对记者表示,如果英国议会在5月的前三周内撤回此项延期协议,那么英国就无需参加欧洲议会选举。

梅首相称,在她的延期协议获得该国议会批准之前,英国将持续拥有欧盟正式的会员权利和义务。

她补充说:“我知道许多人都十分沮丧,但我不得不要求延期”, “遗憾的是,还没能够说服议会。”

这是特里莎·梅第二次到欧盟总部要求延长脱欧期限。目前为止,英国国会表决拒绝了特里莎·梅去年与欧盟达成的脱欧协议,而下议院也投票反对无协议脱欧(no deal brexit)。

欧盟内部之前在提供英国脱欧延期方案存有分歧,但他们必须依法达成协议并作出决定。

BBC记者凯蒂亚·阿德乐(Katya Adler)分析,此次延期到可说是法国总统马克龙(Emmanuel Macron)胜利的一天,因为他是谈判会议室中发言最强硬的一人。

BBC事实核查记者克里斯·莫里斯(Chris Morris)

欧洲理事会主席唐纳德·图斯克之前曾敦促欧盟领导人,在讨论推迟脱欧的最新请求时不要羞辱特里莎·梅。但其他27个欧盟国家仍可能对谈判期间的任何延期施加严厉条件,以确保各国能保护到自己的利益。

欧盟一开始主要是要求英国履行5月23日如期举行欧洲议会选举的承诺——如果那时英国尚未脱欧。

布鲁塞尔峰会(10)的结论草案却表示,如果英国未能举行欧洲议会选举,英国将在6月1日自动脱欧 ,甚至是以无协议脱欧方式脱欧。

可是,即使英国举行了欧洲议会选举,英国选出的欧洲议会议员也将参加7月欧洲新议会的第一届会议。一些欧盟代表担心“不满的英国代表可能会在欧洲议会上阻止欧盟在一系列重要问题上取得进展。”

不同欧洲成员国对这种威胁的严重程度有不同看法,但这顾虑肯定是欧盟内部正讨论的关键问题之一。特里莎·梅曾承诺,英国仍将是一个“建设性和负责任"的成员,并恪守其与欧盟其他国家真诚合作的责任。”

在布鲁塞尔,这是一个具有重要意义的宣称,但它无法约束日后任何一个英国政府会以此与欧盟合作。

首先,欧盟政治结构顶端将有一个重要变化。欧盟委员会的新主席必须由欧盟领导人提名,并经欧洲议会批准。由11月1日起接替正在退休的让-克洛德·容克。12月1日,一位新的欧洲理事会主席将接替图斯克上任。

但是,这两项任命都将来自“有限制性多数表决制。” 换言之,不需要得到所有欧盟成员国一致同意。这将限制不开心的英国政府有能力阻止欧盟关键事务。

“我们一直都戒慎恐惧。”一位欧盟高级官员说,“虽然实际上,未来一年你没办法否决太多事。” 但是,欧盟还有其他一些重要事要做,尤其是2021至2027欧盟未来7年预算的规模和形态,不希望未来还有英国阻扰。

新委员会的预算谈判将如火如荼展开,至少一年内不会作出决定,但预算需得到全体同意。这就是为什么任何英国脱欧延期的时间,几乎肯定会如图斯克所说的那样“不超过一年”的原因之一。

Tuesday, April 2, 2019

बदल गया 'भगवान का अपना देश'

किसानों की खुदकुशी के मामले केरल में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है क्योंकि इस साल अब तक सिर्फ़ इडुक्की ज़िले में ही छह किसानों ने क़र्ज़ की वजह से आत्महत्या कर ली.

राज्य में सत्तारूढ़ वाम मोर्चे को छोड़ भाजपा और कांग्रेस भी अब किसानों की आत्महत्याओं को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं. राजनीतिक दल आत्महत्याओं को इसलिए भी मुद्दा बनाना चाहते हैं क्योंकि इस राज्य में लोकसभा की 20 सीटें हैं.

पिछले लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी 'यूडीएफ' ने 20 में से 12 सीटें जीतीं थीं जबकि वाम मोर्चे ने आठ. इस बार भारतीय जनता पार्टी भी लोकसभा चुनावों में अपना खाता खोलने की आस लगाए हुए है.

भारतीय जनता पार्टी ने कई मुद्दों को लेकर एक राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश ज़रूर की है, लेकिन राज्य में अचानक से तेज़ हुए किसानों की आत्महत्या के मामलों ने मुद्दा बदल दिया है. पिछले साल आई बाढ़ के छह महीनों के बाद भी केरल पूरी तरह से उबर नहीं पाया है.

वैसे तो बाढ़ की चपेट में पूरा राज्य ही था, लेकिन इसने मध्य और उत्तरी इलाक़ों में ज़्यादा तबाही मचाई थी. बाढ़ की चपेट में यहाँ के बाँध और एयरपोर्ट भी आ गए थे. इस दौरान किसानों का भी ख़ूब नुक़सान हुआ जो क़र्ज़ में डूबते चले गए और पिछले दो महीनों के दौरान इस राज्य के कई किसानों ने आत्महत्या कर ली.

इनमें से मसालों की पैदावार कर रहे ज़्यादातर किसानों ने बैंकों से क़र्ज़ लिया था. लेकिन हैरानी वाली बात ये है कि कुछ बैंक, मृत किसानों के परिवारवालों को क़र्ज़ अदायगी के लिए आज भी नोटिस भेज रहे हैं. किसानों की आत्महत्याओं का सबसे ज़्यादा असर इडुक्की ज़िले में हुआ जो पश्चिमी घाट की ख़ूबसूरत वादियों में बसा है.

इस इलाक़े को काली मिर्च, इलाइची और मसालों की खेती के लिए जाना जाता रहा है. दूर-दूर तक मसालों की खेती इडुक्की की रौनक बढ़ा देती है. ये वो इलाक़े हैं, जिन पर केरल वासियों को गर्व है.

लेकिन किसानों की आत्महत्याओं ने इस गर्व को उनके विलाप में बदलना शुरू कर दिया है.

इसी ज़िले के मेरिगिरी गाँव में मातम का माहौल है. यहाँ के 37 वर्षीय किसान संतोष की आत्महत्या के बाद उनके घर में कमाने वाला कोई नहीं बचा है. उनकी वृद्ध माँ ओमना, अपनी बहू और पांच साल के पोते के साथ इस घर में रहती हैं.

बीबीसी से बात करते हुए वो रह-रह कर बिलख उठती हैं. उन्हें अफ़सोस है कि बेटे के मरने के बावजूद, बैंक से नोटिस पर नोटिस आते ही जा रहे हैं.

वो कहती हैं, "मेरा बेटा, संतोष, 37 साल का था. वो बहुत दिनों से खेती कर रहा था. उसने बेहतर खेती के लिए बैंकों से क़र्ज़ लिया था जिसे वापस करना मुश्किल हो रहा था. उसने आत्महत्या कर ली."

ओमना का कहना था कि जैसे-जैसे ज़रूरत पड़ती गई, संतोष ने क़र्ज़ लेना शुरू कर दिया. मसालों की खेती में किसानों को पैसों की ज़रूरत पड़ती रहती है. कुल मिलाकर उन पर 25 लाख रुपये का क़र्ज़ चढ़ गया. उन्हें इस बार अच्छी फसल होने की उम्मीद थी. लेकिन बाढ़ ने सब कुछ बर्बाद कर दिया. बाढ़ के दौरान सिर्फ इडुक्की ज़िले में ही भूस्खलन की कई घटनाएं भी हुईं. इन घटनाओं में सबसे ज़्यादा नुक़सान मसालों की खेती कर रहे किसानों को हुआ.

ओमना ने बताया, "हमारी मसालों की खेती थी. सब ख़त्म हो गया. फिर बैंक से अधिकारी आए. वो क़र्ज़ के पैसे वापस मांग रहे थे. मेरा बेटा 20 हज़ार रुपये लेकर गया. लेकिन वो एक लाख मांग रहे थे. बाढ़ ने सब तबाह कर दिया है. बुढ़ापे में अब हमारा कोई सहारा नहीं बचा."

ढाई साल पहले बिजली का झटका लगने से ओमना के पति की मौत हो गई थी और उसके बाद से संतोष पर ही पूरे घर की ज़िम्मेदारी थी.

कुछ ही दूर पेरिंचनकुट्टी गाँव में शिबू का भी घर है. उनके पिता सहादेवन भी मसाले की खेती करते थे. पिछले साल आई बाढ़ ने अच्छी फसल की उनकी उम्मीदों पर ऐसा पानी फेरा कि उन्होंने भी आत्महत्या कर ली.

शिबू ने बताया कि उनके पिता ने बैंक से पहले तो 12 लाख रुपये का क़र्ज़ लिया था फिर दो लाख रुपये और लिए. कुल मिलाकर बैंकों से 14 लाख रुपये लिए थे.

अपने पिता की तस्वीर हाथ में लिए बैठे शिबू को समझ नहीं आ रहा कि अब क़र्ज़ कैसे चुकाया जाए क्योंकि बैंक से नोटिस भी आ रहे हैं और अधिकारी भी. वो बताते हैं कि जनवरी की 24 तारीख़ को इडुक्की के को-ऑपरेटिव बैंक से उनके पिता को जब नोटिस मिला, तो वो काफ़ी उदास हो गए थे.

शिबू ने बताया, "पहले भी वो क़र्ज़ लेते रहे थे. कभी ऐसा नहीं हुआ कि उन्होंने किसी का क़र्ज़ वापस ना लौटाया हो. इस बार हालात बहुत ख़राब हो गए. बाढ़ ने सारे सपनों पर पानी फेर दिया. 27 जनवरी की शाम जब मैं और मेरे एक पड़ोसी ने उनके कमरे का दरवाज़ा खटखटाया तो अंदर से कोई जवाब नहीं मिला. दरवाज़ा अंदर से बंद नहीं था. हमने दरवाज़ा खोला और देखा कि मेरे पिता ने फँसी लगा ली थी."