Tuesday, April 2, 2019

बदल गया 'भगवान का अपना देश'

किसानों की खुदकुशी के मामले केरल में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है क्योंकि इस साल अब तक सिर्फ़ इडुक्की ज़िले में ही छह किसानों ने क़र्ज़ की वजह से आत्महत्या कर ली.

राज्य में सत्तारूढ़ वाम मोर्चे को छोड़ भाजपा और कांग्रेस भी अब किसानों की आत्महत्याओं को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं. राजनीतिक दल आत्महत्याओं को इसलिए भी मुद्दा बनाना चाहते हैं क्योंकि इस राज्य में लोकसभा की 20 सीटें हैं.

पिछले लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी 'यूडीएफ' ने 20 में से 12 सीटें जीतीं थीं जबकि वाम मोर्चे ने आठ. इस बार भारतीय जनता पार्टी भी लोकसभा चुनावों में अपना खाता खोलने की आस लगाए हुए है.

भारतीय जनता पार्टी ने कई मुद्दों को लेकर एक राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश ज़रूर की है, लेकिन राज्य में अचानक से तेज़ हुए किसानों की आत्महत्या के मामलों ने मुद्दा बदल दिया है. पिछले साल आई बाढ़ के छह महीनों के बाद भी केरल पूरी तरह से उबर नहीं पाया है.

वैसे तो बाढ़ की चपेट में पूरा राज्य ही था, लेकिन इसने मध्य और उत्तरी इलाक़ों में ज़्यादा तबाही मचाई थी. बाढ़ की चपेट में यहाँ के बाँध और एयरपोर्ट भी आ गए थे. इस दौरान किसानों का भी ख़ूब नुक़सान हुआ जो क़र्ज़ में डूबते चले गए और पिछले दो महीनों के दौरान इस राज्य के कई किसानों ने आत्महत्या कर ली.

इनमें से मसालों की पैदावार कर रहे ज़्यादातर किसानों ने बैंकों से क़र्ज़ लिया था. लेकिन हैरानी वाली बात ये है कि कुछ बैंक, मृत किसानों के परिवारवालों को क़र्ज़ अदायगी के लिए आज भी नोटिस भेज रहे हैं. किसानों की आत्महत्याओं का सबसे ज़्यादा असर इडुक्की ज़िले में हुआ जो पश्चिमी घाट की ख़ूबसूरत वादियों में बसा है.

इस इलाक़े को काली मिर्च, इलाइची और मसालों की खेती के लिए जाना जाता रहा है. दूर-दूर तक मसालों की खेती इडुक्की की रौनक बढ़ा देती है. ये वो इलाक़े हैं, जिन पर केरल वासियों को गर्व है.

लेकिन किसानों की आत्महत्याओं ने इस गर्व को उनके विलाप में बदलना शुरू कर दिया है.

इसी ज़िले के मेरिगिरी गाँव में मातम का माहौल है. यहाँ के 37 वर्षीय किसान संतोष की आत्महत्या के बाद उनके घर में कमाने वाला कोई नहीं बचा है. उनकी वृद्ध माँ ओमना, अपनी बहू और पांच साल के पोते के साथ इस घर में रहती हैं.

बीबीसी से बात करते हुए वो रह-रह कर बिलख उठती हैं. उन्हें अफ़सोस है कि बेटे के मरने के बावजूद, बैंक से नोटिस पर नोटिस आते ही जा रहे हैं.

वो कहती हैं, "मेरा बेटा, संतोष, 37 साल का था. वो बहुत दिनों से खेती कर रहा था. उसने बेहतर खेती के लिए बैंकों से क़र्ज़ लिया था जिसे वापस करना मुश्किल हो रहा था. उसने आत्महत्या कर ली."

ओमना का कहना था कि जैसे-जैसे ज़रूरत पड़ती गई, संतोष ने क़र्ज़ लेना शुरू कर दिया. मसालों की खेती में किसानों को पैसों की ज़रूरत पड़ती रहती है. कुल मिलाकर उन पर 25 लाख रुपये का क़र्ज़ चढ़ गया. उन्हें इस बार अच्छी फसल होने की उम्मीद थी. लेकिन बाढ़ ने सब कुछ बर्बाद कर दिया. बाढ़ के दौरान सिर्फ इडुक्की ज़िले में ही भूस्खलन की कई घटनाएं भी हुईं. इन घटनाओं में सबसे ज़्यादा नुक़सान मसालों की खेती कर रहे किसानों को हुआ.

ओमना ने बताया, "हमारी मसालों की खेती थी. सब ख़त्म हो गया. फिर बैंक से अधिकारी आए. वो क़र्ज़ के पैसे वापस मांग रहे थे. मेरा बेटा 20 हज़ार रुपये लेकर गया. लेकिन वो एक लाख मांग रहे थे. बाढ़ ने सब तबाह कर दिया है. बुढ़ापे में अब हमारा कोई सहारा नहीं बचा."

ढाई साल पहले बिजली का झटका लगने से ओमना के पति की मौत हो गई थी और उसके बाद से संतोष पर ही पूरे घर की ज़िम्मेदारी थी.

कुछ ही दूर पेरिंचनकुट्टी गाँव में शिबू का भी घर है. उनके पिता सहादेवन भी मसाले की खेती करते थे. पिछले साल आई बाढ़ ने अच्छी फसल की उनकी उम्मीदों पर ऐसा पानी फेरा कि उन्होंने भी आत्महत्या कर ली.

शिबू ने बताया कि उनके पिता ने बैंक से पहले तो 12 लाख रुपये का क़र्ज़ लिया था फिर दो लाख रुपये और लिए. कुल मिलाकर बैंकों से 14 लाख रुपये लिए थे.

अपने पिता की तस्वीर हाथ में लिए बैठे शिबू को समझ नहीं आ रहा कि अब क़र्ज़ कैसे चुकाया जाए क्योंकि बैंक से नोटिस भी आ रहे हैं और अधिकारी भी. वो बताते हैं कि जनवरी की 24 तारीख़ को इडुक्की के को-ऑपरेटिव बैंक से उनके पिता को जब नोटिस मिला, तो वो काफ़ी उदास हो गए थे.

शिबू ने बताया, "पहले भी वो क़र्ज़ लेते रहे थे. कभी ऐसा नहीं हुआ कि उन्होंने किसी का क़र्ज़ वापस ना लौटाया हो. इस बार हालात बहुत ख़राब हो गए. बाढ़ ने सारे सपनों पर पानी फेर दिया. 27 जनवरी की शाम जब मैं और मेरे एक पड़ोसी ने उनके कमरे का दरवाज़ा खटखटाया तो अंदर से कोई जवाब नहीं मिला. दरवाज़ा अंदर से बंद नहीं था. हमने दरवाज़ा खोला और देखा कि मेरे पिता ने फँसी लगा ली थी."

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